प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में हुक्का बार के संचालन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए हुक्का सर्विस पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि रेस्टोरेंट या अन्य प्रतिष्ठानों में हुक्का उपलब्ध कराने को सामान्य खाद्य सेवा या वैध व्यापारिक गतिविधि के रूप में नहीं माना जा सकता।
अदालत के समक्ष हुक्का उपलब्ध कराने को लेकर विभिन्न दलीलें रखी गई थीं। इनमें निर्धारित स्मोकिंग एरिया में हुक्का देने, ग्राहकों को सेल्फ-सर्विस की सुविधा उपलब्ध कराने तथा हुक्का किराये पर देने जैसे तर्क भी शामिल थे। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और गैर-धूम्रपान करने वाले लोगों के स्वच्छ हवा के अधिकार पर विशेष जोर दिया। अदालत ने कहा कि हुक्का तैयार करना और उसे ग्राहकों को उपलब्ध कराना भी एक प्रकार की सेवा है और इसे केवल खाद्य विभाग से लाइसेंस लेकर संचालित नहीं किया जा सकता।
फैसले में COTPA (Cigarettes and Other Tobacco Products Act) के तहत लागू प्रावधानों और पुलिस की कार्रवाई की शक्तियों को भी महत्वपूर्ण माना गया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आदेश की प्रति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में हुक्का बार के संचालन को लेकर पहले भी न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई होती रही है। फरवरी 2026 के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तंबाकू-मुक्त हर्बल हुक्का मिश्रण के मामले में अलग स्थिति पर विचार करते हुए मिश्रण की जांच कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि यदि मिश्रण में तंबाकू या उसके डेरिवेटिव पाए जाते हैं तो संबंधित तंबाकू कानून लागू होंगे।
वहीं, 2020 में हाईकोर्ट ने कोविड-19 संक्रमण के दौरान उत्तर प्रदेश के बार, रेस्टोरेंट और कैफे में हुक्का सर्व करने पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। उस आदेश की प्रति मुख्य सचिव और जिलाधिकारियों को भेजने के निर्देश भी दिए गए थे।
हालिया फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में हुक्का बार और रेस्टोरेंट में हुक्का सर्विस को लेकर नियामकीय स्थिति और अधिक सख्त हो गई है।

