Home State News फतेहपुर सीकरी दरगाह के सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती का निधन, 88 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

फतेहपुर सीकरी दरगाह के सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती का निधन, 88 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

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फतेहपुर सीकरी दरगाह के सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती का निधन, 88 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

81 वर्षों तक निभाई सज्जादानशीन की जिम्मेदारी, हिंदू-मुस्लिम एकता और सूफी परंपरा के रहे मजबूत संवाहक

लखनऊ/नई दिल्ली। विश्व प्रसिद्ध हजरत शेख सलीम चिश्ती दरगाह, फतेहपुर सीकरी के सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती का बुधवार देर रात निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से सूफी समुदाय, अनुयायियों और देशभर के जायरीन में शोक की लहर दौड़ गई है।

उनके पुत्र अरशद फरीदी ने बताया कि पीरजादा रईस मियां चिश्ती ने 8 जुलाई 2026 की रात लगभग 11:30 बजे लखनऊ के एरा मेडिकल कॉलेज में अंतिम सांस ली।

आज फतेहपुर सीकरी में होगा सुपुर्द-ए-खाक

परिजनों के अनुसार, उनका जनाजा 9 जुलाई 2026 को असर की नमाज के बाद शाम करीब 5:15 बजे फतेहपुर सीकरी स्थित हजरत शेख सलीम चिश्ती दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

अंतिम दर्शन और जनाजे में शामिल होने के लिए देशभर से जायरीन, उलेमा, सामाजिक, धार्मिक और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों के पहुंचने की संभावना है।

16वीं पीढ़ी के प्रत्यक्ष वंशज थे रईस मियां चिश्ती

अरशद फरीदी के अनुसार, पीरजादा रईस मियां चिश्ती सूफी संत हजरत शेख सलीम चिश्ती की 16वीं पीढ़ी के प्रत्यक्ष वंशज थे। मात्र सात वर्ष की आयु में उन्होंने सज्जादानशीन की जिम्मेदारी संभाली और लगातार 81 वर्षों तक इस महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन किया।

उन्होंने अपने जीवन को सूफी परंपरा, आध्यात्मिक सेवा और मानवता के संदेश के प्रसार के लिए समर्पित रखा।

प्रेम, शांति और सांप्रदायिक सौहार्द का दिया संदेश

अपने लंबे कार्यकाल के दौरान पीरजादा रईस मियां चिश्ती ने सूफी विचारधारा के मूल सिद्धांत—प्रेम, शांति, भाईचारा और इंसानियत—को समाज तक पहुंचाने का निरंतर प्रयास किया।

वे हिंदू-मुस्लिम एकता, सांप्रदायिक सद्भाव और गंगा-जमुनी तहजीब के प्रबल समर्थक माने जाते थे। दरगाह पर आने वाले लाखों जायरीन की सेवा और व्यवस्थाओं को लेकर भी वह सदैव सक्रिय रहते थे।

दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्षों और भारतीय नेताओं ने लिया आशीर्वाद

उनके नेतृत्व में फतेहपुर सीकरी दरगाह देश और विदेश की अनेक विशिष्ट हस्तियों की आस्था का केंद्र बनी रही। उनके कार्यकाल में करीब 20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों ने दरगाह पर हाजिरी दी।

विदेशी गणमान्य व्यक्तियों में मिस्र के राष्ट्रपति कर्नल नासिर, भूटान के राजा, प्रिंस ऑफ वेल्स, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी, जांबिया के प्रधानमंत्री सहित कई अन्य प्रमुख हस्तियां शामिल रहीं।

भारत की ओर से पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और वी.पी. सिंह जैसे अनेक प्रधानमंत्रियों एवं राष्ट्रीय नेताओं ने भी दरगाह पर जियारत की और पीरजादा रईस मियां चिश्ती से आशीर्वाद प्राप्त किया।

सूफी परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति

पीरजादा रईस मियां चिश्ती का निधन सूफी परंपरा और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके अनुयायियों का कहना है कि उन्होंने जीवनभर प्रेम, सद्भाव, आध्यात्मिकता और मानवता का संदेश दिया, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा।

उनकी सादगी, विनम्रता और समाज को जोड़ने वाली सोच के कारण वे देश-विदेश के लाखों लोगों के बीच सम्मानित और श्रद्धेय व्यक्तित्व के रूप में याद किए जाएंगे।

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