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छत्तीसगढ़ टीएलपीएस 2025 रिपोर्ट जारी, प्रारंभिक शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर जोर

कक्षा 1-2 की शिक्षण प्रक्रिया का अध्ययन, ‘निपुण भारत मिशन’ को मिलेगी नई दिशा; मातृभाषा आधारित शिक्षण और शिक्षक प्रशिक्षण पर विशेष बल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) ने टाटा ट्रस्ट और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), छत्तीसगढ़ के सहयोग से ‘टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (TLPS) 2025’ रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट 18 जुलाई 2026 को एससीईआरटी, रायपुर के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जारी की गई।

यह सर्वे कक्षा 1 और 2 में शिक्षण प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति को समझने तथा शुरुआती कक्षाओं में अपनाई जा रही शिक्षण पद्धतियों का आकलन करने के उद्देश्य से किया गया। रिपोर्ट के निष्कर्ष ‘निपुण भारत मिशन’ के तहत बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक माने जा रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों और अधिकारियों की रही मौजूदगी

रिपोर्ट विमोचन कार्यक्रम में एससीईआरटी छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त संचालक जे.पी. रथ, एलएलएफ के राष्ट्रीय सलाहकार (बहुभाषी शिक्षा) पद्मश्री महेंद्र कुमार मिश्रा, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न DIET के प्राचार्य, समग्र शिक्षा अभियान के प्रतिनिधि, राज्य संसाधन समूह (SRG) के सदस्य तथा शिक्षा विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

100 कक्षाओं के अध्ययन पर आधारित रिपोर्ट

यह अध्ययन नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच कबीरधाम और नारायणपुर जिलों की 100 कक्षाओं में किए गए प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित है। कार्यक्रम में एलएलएफ के सीनियर एकेडमिक स्पेशलिस्ट अजय गुप्ता ने सर्वेक्षण की रूपरेखा और कार्यप्रणाली प्रस्तुत की, जबकि सीनियर स्पेशलिस्ट (बहुभाषी शिक्षा) संजय गुलाटी ने रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष साझा किए।

‘बच्चों को बिना डर सीखने का अवसर मिलना चाहिए’

एससीईआरटी छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त संचालक जे.पी. रथ ने कहा कि प्रभावी शिक्षा का आधार ऐसा कक्षा वातावरण है, जहां बच्चे बिना किसी भय के अपनी गलतियों से सीख सकें। उन्होंने कहा कि एक अच्छा शिक्षक केवल उत्तर नहीं देता, बल्कि ऐसे प्रश्न छोड़ता है जो बच्चों को जीवनभर सीखने के लिए प्रेरित करते हैं।

बहुस्तरीय कक्षाओं की चुनौतियों और अवसरों पर प्रकाश

टाटा ट्रस्ट की डिप्टी हेड ऑफ प्रोग्राम्स एवं हेड ऑफ एजुकेशन अमृता पटवर्धन ने कहा कि यह रिपोर्ट केवल कार्यक्रमों की जानकारी नहीं देती, बल्कि यह भी बताती है कि कक्षा के भीतर शिक्षक और बच्चे सीखने-समझने की प्रक्रिया का अनुभव कैसे करते हैं। उन्होंने बताया कि सर्वे में शामिल 84 प्रतिशत स्कूलों में एक ही कक्षा में विभिन्न स्तर के बच्चों को पढ़ाया जाता है, जिससे अवसरों के साथ-साथ नई चुनौतियां भी सामने आती हैं। उन्होंने बहुभाषी शिक्षण, उपयुक्त शिक्षण सामग्री और बहुस्तरीय कक्षाओं के लिए प्रभावी रणनीतियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

क्रियान्वयन ही सफलता की कुंजी

कार्यक्रम में शिक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि अच्छी नीतियां तभी सफल होती हैं जब उनका प्रभाव कक्षा में दिखाई दे। डाइट, जशपुर के प्राचार्य एम.जेड.यू. सिद्दीकी ने कहा कि संसाधनों और नीतियों का वास्तविक मूल्य तभी है जब वे बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार लाएं। वहीं एससीईआरटी की राज्य स्रोत समूह की सदस्या पुष्पा शुक्ला ने कहा कि सीखने के परिणामों में सुधार के लिए कक्षा की शिक्षण प्रक्रिया में बदलाव आवश्यक है।

भाषाई विविधता के अनुरूप शिक्षण पर जोर

एलएलएफ के संस्थापक एवं कार्यकारी निदेशक डॉ. धीर झिंगरन ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भाषाई, सामाजिक और भौगोलिक विविधता उसकी कक्षाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनके अनुसार, टीएलपीएस रिपोर्ट यह समझने में मदद करती है कि शिक्षक विभिन्न भाषाई और सीखने की जरूरतों के अनुरूप किस प्रकार शिक्षण कर रहे हैं तथा किन क्षेत्रों में और सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों और मेंटर्स को निरंतर शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं—

  • 66 प्रतिशत शिक्षक बच्चों की मातृभाषा से परिचित पाए गए।
  • 82 प्रतिशत कक्षाओं में शिक्षक समूह या व्यक्तिगत गतिविधियों के दौरान बच्चों के कार्य की नियमित निगरानी नहीं कर रहे थे।
  • 70 प्रतिशत कक्षाओं में बच्चों के सीखने के स्तर के अनुसार शिक्षण पद्धति में आवश्यक बदलाव नहीं देखा गया।
  • रिपोर्ट में बच्चों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने, दैनिक जीवन के अनुभवों से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा मातृभाषा के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है।

एफएलएन को मजबूत बनाने की दिशा में कार्यरत है एलएलएफ

वर्ष 2015 में स्थापित लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF) एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न राज्य सरकारों के साथ कार्य कर रही है।

संस्था का कार्य तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है—

  • शिक्षकों एवं मेंटर्स का पेशेवर विकास,
  • बहुभाषी शिक्षण आधारित मॉडल कार्यक्रमों का संचालन,
  • शिक्षा व्यवस्था को संस्थागत रूप से मजबूत बनाना।

एलएलएफ अब तक 10 राज्यों में 2.18 करोड़ से अधिक बच्चों और 11.8 लाख शिक्षकों तक पहुंच बना चुकी है। वहीं जिला स्तर पर इसके प्रयासों से 14 लाख बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार दर्ज किया गया है।

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