इजरायल से जुड़े हालिया संघर्ष के कारण अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच दूरी बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। इस सूची में अब दक्षिण कोरिया का नाम भी जुड़ता नजर आ रहा है।दक्षिण कोरिया लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संतुलित रुख अपनाता रहा है, खासकर फिलिस्तीन से जुड़े मामलों में।
लेकिन मौजूदा हालात में उसका रुख बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। इसकी एक बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ता तनाव है, जहां से कोरिया अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समुद्री मार्ग पर तनाव बढ़ने से कोरिया के कई तेल टैंकर प्रभावित हुए हैं, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। यही कारण है कि कोरिया अब युद्ध के बजाय शांति और सीजफायर की अपील करता दिख रहा है।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने हाल ही में एक पुराना वीडियो साझा किया, जिसमें कथित तौर पर इजरायल के सैनिकों को एक इमारत से शव गिराते हुए दिखाया गया। इस पोस्ट के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है।राष्ट्रपति ली ने इस मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि अगर वीडियो सही है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि युद्ध की स्थिति में भी मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन जरूरी है।इस पूरे घटनाक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का भी असर देखने को मिल रहा है। ट्रंप ने सहयोगी देशों से युद्ध में अधिक समर्थन की अपेक्षा जताई थी, लेकिन कोरिया का रुख संकेत देता है कि वह किसी भी अनचाहे सैन्य संघर्ष में शामिल होने से बचना चाहता है।कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि वैश्विक तनाव के बीच कई देश अब अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्वतंत्र रुख अपनाने लगे हैं।

