खेती में सबसे बड़ा जोखिम मौसम से जुड़ा होता है। कभी सूखा तो कभी बेमौसम बारिश या ओलावृष्टि—ऐसी परिस्थितियां किसानों की पूरी मेहनत को कुछ ही समय में नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसी जोखिम को कम करने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की है, जो किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है।
इस योजना की खास बात यह है कि इसमें किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना पड़ता है। खरीफ फसलों के लिए लगभग 2%, रबी फसलों के लिए 1.5% और बागवानी या व्यावसायिक फसलों के लिए करीब 5% प्रीमियम तय किया गया है। बाकी राशि सरकार द्वारा वहन की जाती है, जिससे किसानों पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता।
यह बीमा योजना बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक फसल को कवर करती है। अगर सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, तेज बारिश, भूस्खलन या बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसल खराब होती है, तो किसान मुआवजा पाने के पात्र होते हैं। यहां तक कि कटाई के बाद 14 दिनों तक खेत में रखी फसल को नुकसान होने पर भी क्लेम मिल सकता है।योजना का लाभ लेने के लिए नुकसान होने पर 72 घंटे के अंदर सूचना देना जरूरी होता है। समय पर जानकारी देने से क्लेम प्रक्रिया आसान हो जाती है।
कैसे करें आवेदन?
इस योजना से जुड़ना अब काफी आसान है। किसान ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन कर सकते हैं।आधिकारिक पोर्टल पर जाकर खुद रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है
नजदीकी CSC सेंटर, बैंक या सहकारी समिति के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है, आवेदन के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की जरूरत होती है, जैसे:जमीन के कागजात, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, फसल बोने का प्रमाण, जो किसान बैंक से कृषि लोन लेते हैं, उनका बीमा अक्सर बैंक के जरिए अपने आप हो जाता है। वहीं अन्य किसान भी अपनी इच्छा से इस योजना में शामिल हो सकते हैं।कुल मिलाकर, यह योजना किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। सही समय पर किया गया छोटा सा आवेदन किसानों की सालभर की मेहनत और आय को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।

