दिल्ली से पुणे जाने वाली स्पाइसजेट की एक फ्लाइट में तकनीकी खराबी के बाद यात्रियों की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया। बताया जा रहा है कि यात्रियों के विमान में सवार होने के बाद केबिन के अंदर का तापमान अचानक बढ़ने लगा।
विमान का एयर कंडीशनिंग सिस्टम काम करना बंद कर गया, जिससे कुछ ही देर में केबिन के अंदर गर्मी और घुटन की स्थिति बन गई। अत्यधिक गर्मी और हवा की कमी के कारण यात्रियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी।
यात्रियों का आरोप है कि इसके बावजूद विमान को उड़ान भराने की तैयारी की जा रही थी। जब स्थिति बिगड़ने लगी तो यात्रियों ने इसका विरोध किया और विमान का गेट खोलने तथा सीढ़ियां लगाने की मांग की, ताकि उन्हें ताजी हवा मिल सके और वे सुरक्षित रूप से विमान से बाहर निकल सकें।
यात्रियों के विरोध के बाद आखिरकार विमान को टेक-ऑफ करने से रोक दिया गया और सभी यात्रियों को विमान से बाहर निकाल लिया गया। यात्रियों की सतर्कता और समय रहते लिए गए फैसले से एक संभावित गंभीर स्थिति को टाल दिया गया।
अब सवाल यह है कि क्या तकनीकी खराबी की जानकारी होने के बावजूद विमान को उड़ाने की तैयारी की जा रही थी? घटना को लेकर एयरलाइन की ओर से तकनीकी खराबी और यात्रियों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर भी नजर रहेगी।

