मत्स्य क्षेत्र में अब आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है। आईसीएआर-केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान यानी आईसीएआर-सीआईएफआरआई, एनएफडीबी के सहयोग से जीवित मछलियों के कम दूरी तक परिवहन के लिए ड्रोन तकनीक की व्यवहार्यता का परीक्षण कर रहा है।
इस पायलट परियोजना को 116.85 लाख रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है। इसका लक्ष्य ऐसी ड्रोन प्रणाली विकसित करना है, जो मछलियों की गुणवत्ता और स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए करीब 10 किलोमीटर तक 100 किलोग्राम जीवित मछलियों का परिवहन कर सके। परियोजना के तहत अब तक 7 किलोमीटर की दूरी तक 70 किलोग्राम पेलोड के परिवहन का सफल प्रदर्शन किया जा चुका है।

मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोगों को डिजिटल बाजार से जोड़ने पर भी सरकार का जोर है। मत्स्य विभाग ने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स यानी ओएनडीसी के साथ समझौता किया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक मछुआरों, मछली किसानों, मछली किसान उत्पादक संगठनों और उद्यमियों को डिजिटल माध्यम से अपने उत्पाद बेचने और बेहतर कीमत हासिल करने का अवसर देना है।

पीएमएमएसवाई के तहत 2,195 मत्स्य सहकारी समितियों को मछली किसान उत्पादक संगठनों के रूप में सहायता प्रदान की गई है। इसके लिए 544.85 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।
भारत सरकार अब प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, बेहतर लॉजिस्टिक्स, डिजिटल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के जरिए अंतर्देशीय मत्स्य पालन को निर्यात की नई ताकत बनाने की दिशा में काम कर रही है। मकसद साफ है—मछली किसानों और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की आय बढ़ाना, नए बाजार उपलब्ध कराना और भारतीय मत्स्य उत्पादों को वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान दिलाना।

