नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में भारत ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है। सरकार के अनुसार, वर्ष 2021 से 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। सरकार का कहना है कि पहले जहां प्रत्यर्पण प्रक्रिया धीमी और जटिल थी, वहीं अब इसे ‘राष्ट्रीय प्राथमिकता’ और ‘मिशन मोड’ में संचालित किया जा रहा है।
सरकार के मुताबिक, भगोड़े अपराधियों का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। इसी दृष्टिकोण के साथ एक खुफिया-आधारित, प्रौद्योगिकी-संचालित और समन्वित मॉडल विकसित किया गया है।
तीन स्तंभों पर आधारित रणनीति
गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सरकार ने भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई को तीन प्रमुख आधारों पर आगे बढ़ाया है—
- वैश्विक अभियान (Global Operations)
- मजबूत अंतर-एजेंसी समन्वय
- स्मार्ट कूटनीति (Smart Diplomacy)
सरकार का दावा है कि पहले की सरकारों में प्रत्यर्पण को लेकर राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया।
कानूनी ढांचे को किया गया मजबूत
सरकार ने वर्ष 2019 में एनआईए संशोधन अधिनियम और यूएपीए संशोधन अधिनियम लागू किए। इसके बाद वर्ष 2024 में लागू तीन नए आपराधिक कानूनों में भगोड़े अपराधियों के खिलाफ विशेष प्रावधान जोड़े गए।
विशेष रूप से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 355 और 356 के तहत पहली बार ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ (Trial in Absentia) का प्रावधान किया गया, जिससे आरोपी की अनुपस्थिति में भी मुकदमे की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
‘भारतपोल’ से बढ़ी इंटरपोल के साथ समन्वय क्षमता
जनवरी 2025 में सरकार ने ‘भारतपोल (BHARATPOL)’ लॉन्च किया, जिसके माध्यम से 1,400 से अधिक केंद्रीय और राज्य एजेंसियों को इंटरपोल नेटवर्क से जोड़ा गया। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रक्रिया तेज हुई और कई मामलों में सूचना साझा करने का समय 3 से 10 दिनों तक सिमट गया।
रेड कॉर्नर नोटिस और ऑपरेशन त्रिशूल की सफलता
सरकार के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए। वहीं ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ के तहत विदेशों में नाम और पहचान बदलकर छिपे अपराधियों का पता लगाने के लिए सैटेलाइट तकनीक, डिजिटल फुटप्रिंट और जियो-लोकेशन ट्रैकिंग का उपयोग किया गया।
आर्थिक अपराधियों पर भी सख्त कार्रवाई
सरकार ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों की ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई। वहीं ₹18,762 करोड़ की राशि सफलतापूर्वक वापस (Restitution) कराई गई, जिसमें आर्थिक अपराध कर देश छोड़कर भागे आरोपियों की संपत्तियां शामिल हैं।
किन मामलों के अपराधी लौटाए गए
सरकार के अनुसार, भारत वापस लाए गए 274 भगोड़ों में आतंकवादी, गैंगस्टर, आर्थिक अपराधी, मादक पदार्थ तस्कर, हत्या, दुष्कर्म, पॉक्सो, मानव तस्करी, साइबर अपराध और संगठित अपराध से जुड़े आरोपी शामिल हैं।
‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ मॉडल पर जोर
सरकार ने कहा कि इस अभियान की सफलता के पीछे आईबी, सीबीआई, एनआईए, प्रवर्तन निदेशालय (ED), रॉ (R&AW), विदेश मंत्रालय, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), डीजीजीआई और राज्य पुलिस सहित विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जनवरी 2026 में मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के तहत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन भी इसी दिशा में एक अहम कदम बताया गया है।
सरकार का कहना है कि विदेशों में छिपे भगोड़े अपराधियों के खिलाफ यह अभियान केवल कानून लागू करने की कार्रवाई नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, न्याय व्यवस्था और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

