स्विट्जरलैंड के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर भारत, डीजल खपत में 185 करोड़ लीटर की कमी से विदेशी मुद्रा और पर्यावरण दोनों को बड़ा लाभ
नई दिल्ली, 22 जुलाई। भारतीय रेलवे ने रेल विद्युतीकरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश के 99.6 प्रतिशत ब्रॉड गेज (बीजी) रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ भारत रेलवे विद्युतीकरण के मामले में स्विट्जरलैंड (100 प्रतिशत) के बाद दुनिया का दूसरा सबसे अधिक विद्युतीकृत रेलवे नेटवर्क बन गया है। रेल मंत्रालय के अनुसार शेष नेटवर्क पर भी तेजी से काम जारी है।
केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में यह जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय रेलवे ने दुनिया के सबसे तेज रेल विद्युतीकरण अभियानों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा किया है।
12 वर्षों में 48 हजार किलोमीटर से अधिक रेलमार्ग का विद्युतीकरण
रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 से पहले लगभग 60 वर्षों में देश में 21,801 मार्ग किलोमीटर रेल लाइन का विद्युतीकरण हुआ था। वहीं 2014 से 2026 के बीच मात्र 12 वर्षों में 48,072 मार्ग किलोमीटर रेलमार्ग का विद्युतीकरण किया गया। अब सभी नई रेल लाइन और मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को शुरू से ही विद्युतीकरण के साथ विकसित किया जा रहा है।
दुनिया के प्रमुख देशों से आगे निकला भारत
अंतरराष्ट्रीय रेलवे संघ (यूआईसी) की जून 2025 की रिपोर्ट के अनुसार रेलवे विद्युतीकरण के मामले में भारत कई विकसित देशों से आगे निकल चुका है।
- स्विट्जरलैंड – 100%
- भारत – 99.6%
- चीन – 82%
- स्पेन – 67%
- जापान – 64%
- फ्रांस – 60%
- ब्रिटेन – 39%
इस उपलब्धि के साथ भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे व्यापक रूप से विद्युतीकृत बड़े रेलवे नेटवर्क में शामिल हो गया है।
डीजल खपत में बड़ी कमी, विदेशी मुद्रा की बचत
रेल विद्युतीकरण का सबसे बड़ा लाभ डीजल की खपत में कमी के रूप में सामने आया है। वर्ष 2015-16 में रेल संचालन के लिए 293 करोड़ लीटर डीजल की खपत होती थी, जो 2024-25 में घटकर 108 करोड़ लीटर रह गई है। यानी करीब 185 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई है।
इससे न केवल ईंधन आयात पर होने वाला खर्च कम हुआ है, बल्कि देश की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की भी बड़ी बचत हुई है।
स्वच्छ परिवहन को मिला बढ़ावा
भारतीय रेलवे का कहना है कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ ऊर्जा दक्ष भी है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार एक टन माल को एक किलोमीटर तक ले जाने पर सड़क परिवहन से 101 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन होता है, जबकि रेल परिवहन में केवल 11.5 ग्राम CO₂ उत्सर्जित होती है। यानी रेल परिवहन सड़क की तुलना में लगभग 89 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन करता है।
नवीकरणीय ऊर्जा पर भी बढ़ा जोर
रेलवे अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए सौर और पवन ऊर्जा का तेजी से उपयोग बढ़ा रहा है। जून 2026 तक रेलवे ने—
- 1,161 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता
- 103 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता
संचालित कर ली है। इस प्रकार रेलवे की कुल 1,260 मेगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता कार्यरत है। भविष्य में रेलवे अपनी बिजली की जरूरतों को सौर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा स्रोतों से पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है।
लगभग सभी रेलवे जोन हुए पूर्ण विद्युतीकृत
देश के अधिकांश रेलवे जोन अब 100 प्रतिशत विद्युतीकृत हो चुके हैं। इनमें मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे, पूर्व रेलवे, दक्षिण मध्य रेलवे, पश्चिम रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे, पूर्व मध्य रेलवे, कोंकण रेलवे और कोलकाता मेट्रो सहित कई प्रमुख जोन शामिल हैं।
अधिकांश राज्यों में पूरा हुआ विद्युतीकरण
राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब, झारखंड, उत्तराखंड, तेलंगाना, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित अधिकांश राज्यों में ब्रॉड गेज रेल नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है।
मिशन मोड में जारी है कार्य
रेल मंत्रालय के अनुसार 100 प्रतिशत विद्युतीकरण मिशन को गति देने के लिए परियोजना निगरानी समूह (पीएमजी) पोर्टल, प्रभावी मॉनिटरिंग व्यवस्था, पर्याप्त वित्तीय संसाधन और क्षेत्रीय इकाइयों को अधिक वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। शेष रेल मार्गों पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।
रेलवे का मानना है कि व्यापक विद्युतीकरण से न केवल तेज, सुरक्षित और किफायती रेल सेवा उपलब्ध होगी, बल्कि भारत के नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन और हरित परिवहन के लक्ष्य को भी नई गति मिलेगी।

