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नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन पर आधारित दुर्लभ प्रदर्शनी का शुभारंभ, ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष आयोजन

नई दिल्ली। ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को समर्पित ‘रेनेसां ऑफ आनंदमठ’ तथा नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन और उनके संघर्ष को दर्शाने वाली एक विशेष प्रदर्शनी का शुक्रवार को नई दिल्ली के सरोजनी नगर स्थित विनय नगर बंगाली सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शुभारंभ किया गया।

प्रदर्शनी का उद्घाटन एनबीसीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. के.पी. महादेवस्वामी ने किया। इस अवसर पर उन्होंने नेताजी के जीवन और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

32 वर्षों की मेहनत से तैयार हुआ दुर्लभ संग्रह

प्रदर्शनी की सबसे बड़ी विशेषता नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन से जुड़ी दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह है, जिसे पृथ्वीशदास गुप्ता ने लगभग 32 वर्षों के अथक शोध और प्रयास से तैयार किया है। नेताजी के जीवन से प्रेरित होकर उन्होंने देश-विदेश के अनेक संग्राहकों और संस्थानों से संपर्क कर ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं एकत्र कीं।

इस संग्रह में नेताजी की वर्दी पर लगाया जाने वाला ब्रॉन्ज बैज, 13 पैरामिलिट्री अवार्ड सहित कई दुर्लभ स्मृतिचिह्न शामिल हैं, जिन्हें लंदन के एक संग्राहक से प्राप्त किया गया। इन ऐतिहासिक धरोहरों को भारत के स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य विरासत माना जा रहा है।

शोध और अध्ययन से साकार हुआ संग्रह

पृथ्वीशदास गुप्ता ने इस संग्रह को तैयार करने के लिए नेताजी के जीवन और आज़ादी के आंदोलन से जुड़े अनेक ऐतिहासिक स्रोतों का अध्ययन किया। उन्होंने ‘स्ट्रगल ऑफ इंडिया’ और ‘द स्प्रिंग टाइगर’ जैसी पुस्तकों का गहन अध्ययन कर इस दुर्लभ संग्रह को ऐतिहासिक रूप दिया।

बड़ी संख्या में विद्यार्थी और गणमान्य लोग रहे उपस्थित

प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में सीपीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. सजल मिश्रा, दिल्ली सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव शुभांकर घोष, विद्यालय की प्रधानाचार्या दीप्ति सिंह करकोटिया, शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

आयोजकों के अनुसार, यह प्रदर्शनी केवल नेताजी के जीवन और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को प्रदर्शित करने का प्रयास नहीं है, बल्कि युवाओं में राष्ट्रभक्ति, ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

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