नई दिल्ली। राष्ट्रीय सम्मान के प्रति अनादर को रोकने के उद्देश्य से केंद्र सरकार राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित संशोधन के तहत अब राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान को भी दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। नए प्रावधान के अनुसार दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को तीन वर्ष तक के कारावास की सजा हो सकती है। यह दंड राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के अपमान पर वर्तमान में लागू प्रावधानों के समान होगा।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद इस संशोधन विधेयक को 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में पेश किए जाने और पारित कराने की तैयारी है। यदि विधेयक संसद से पारित होकर कानून का रूप लेता है, तो राष्ट्रगीत के सम्मान को भी कानूनी संरक्षण का दायरा और अधिक मजबूत मिलेगा।
प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को सुनिश्चित करना तथा उनके अपमान की घटनाओं पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान करना बताया जा रहा है। सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय गान और राष्ट्रगीत जैसे राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीक देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए इनके सम्मान की रक्षा आवश्यक है।
इस बीच, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने प्रस्तावित संशोधन का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रगीत का अपमान राष्ट्रीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों के सम्मान के विपरीत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों का आदर प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए।
विनोद बंसल ने इस मुद्दे पर कई सवाल भी उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसी कौन-सी मानसिकता है जो राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीकों का अपमान करती है? उन्होंने यह भी कहा कि क्या कोई विचारधारा या धार्मिक मान्यता राष्ट्र और मातृभूमि से ऊपर हो सकती है तथा क्या ‘वंदे मातरम्’ का विरोध राष्ट्रीय गौरव के विरुद्ध नहीं माना जाना चाहिए।
प्रस्तावित विधेयक पर अंतिम निर्णय संसद में चर्चा और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो राष्ट्रगीत के सम्मान से संबंधित कानूनी प्रावधान पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और प्रभावी हो जाएंगे।

