HomeNational Newsड्रिप सिंचाई, आधुनिक कृषि तकनीकों और किसान प्रशिक्षण पर रहेगा विशेष जोर

ड्रिप सिंचाई, आधुनिक कृषि तकनीकों और किसान प्रशिक्षण पर रहेगा विशेष जोर

नई दिल्ली। इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) और जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड (जेआईएसएल) ने गुजरात में वैज्ञानिक, सतत और प्रौद्योगिकी आधारित गन्ना खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 8 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित आईपीएल के कॉर्पोरेट कार्यालय में संपन्न हुआ।

इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थाएं गुजरात में ड्रिप सिंचाई प्रणाली के सर्वेक्षण, डिजाइन, आपूर्ति और स्थापना के साथ-साथ किसानों के क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा खेतों में प्रदर्शन (डेमो) के माध्यम से आधुनिक गन्ना खेती की तकनीकों को बढ़ावा देंगी।

समझौते के अंतर्गत आईपीएल और जेआईएसएल संयुक्त रूप से सतत गन्ना उत्पादन के लिए जल-कुशल सिंचाई और फर्टिगेशन तकनीकों को प्रोत्साहित करेंगे। इसके अलावा आधुनिक सिंचाई समाधान, सटीक कृषि इनपुट प्रबंधन तथा उन्नत कृषि पद्धतियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा, ताकि किसान नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हों।

किसानों में जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यशालाओं, प्रशिक्षण शिविरों और खेतों में प्रदर्शन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, जल उपयोग दक्षता बढ़ाने और चीनी उत्पादन में वृद्धि के राष्ट्रीय लक्ष्यों को समर्थन देने की दिशा में भी दोनों संस्थाएं मिलकर कार्य करेंगी।

समझौते के तहत पात्र किसानों को माइक्रो इरिगेशन सिस्टम अपनाने के लिए ऋण और सरकारी अनुदान उपलब्ध कराने में भी सहयोग किया जाएगा। इससे फसल उत्पादन, गुणवत्ता और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

यह साझेदारी आईपीएल और जेआईएसएल की उस साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत नवीन तकनीकों और व्यावहारिक समाधानों के माध्यम से गन्ना किसानों को सशक्त बनाया जाएगा। इससे उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ बहुमूल्य जल संसाधनों का संरक्षण होगा और गुजरात में सतत कृषि विकास को नई गति मिलेगी।

जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड के गुजरात राज्य प्रमुख गिरधर लोह ने कहा कि यह साझेदारी गन्ना खेती में ड्रिप सिंचाई तकनीक को तेजी से अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उनके अनुसार, इससे जल उपयोग दक्षता बढ़ेगी, फसल उत्पादकता में सुधार होगा, खेती की लागत कम होगी, किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा भारत के चीनी और जैव ईंधन क्षेत्र के सतत विकास को भी मजबूती मिलेगी।

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