नई दिल्ली। स्कोडा ऑटो इंडिया की भारत में निर्मित कॉम्पैक्ट एसयूवी काइलैक (Kylaq) ने पुणे से प्राग तक की 19,351 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक सड़क यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। 70 दिनों तक चली इस यात्रा ने भारत में बनी एक यात्री कार की वैश्विक क्षमता, इंजीनियरिंग और विश्वसनीयता को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया।
यह यात्रा महाराष्ट्र के पुणे स्थित स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के विनिर्माण संयंत्र से शुरू हुई और चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में समाप्त हुई। इस प्रकार काइलैक ने अपने जन्मस्थान पुणे को स्कोडा ऑटो के मूल स्थान म्लादा बोलेस्लाव और प्राग से जोड़ने का प्रतीकात्मक कार्य किया।
13 देशों से होकर गुजरी यात्रा
काइलैक ने भारत में पुणे, मुंबई, वडोदरा, उदयपुर, जयपुर, आगरा और लखनऊ जैसे शहरों से गुजरते हुए गोरखपुर के पास नेपाल सीमा तक सफर किया। इसके बाद यह नेपाल, चीन के तिब्बती पठार, किर्गिस्तान, उज़्बेकिस्तान, कज़ाख़िस्तान, जॉर्जिया, तुर्किये, बुल्गारिया, रोमानिया, हंगरी और स्लोवाकिया होते हुए प्राग पहुंची।
इस दौरान एसयूवी ने -154 मीटर से लेकर 5,364 मीटर की ऊंचाई तक सफर किया और -12 डिग्री सेल्सियस से 43 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को झेला।
भारतीय इंजीनियरिंग की वैश्विक परीक्षा
स्कोडा ऑटो इंडिया के ब्रांड निदेशक आशीष गुप्ता ने कहा कि यह अभियान केवल एक लंबी यात्रा पूरी करने का मामला नहीं है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारतीय इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षमता का सशक्त प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि 19,351 किलोमीटर की इस यात्रा में काइलैक ने हर तरह की सड़क, मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों में अपनी विश्वसनीयता साबित की है।
काइलैक की खासियतें
स्कोडा काइलैक
भारत में विकसित
श्रेणी
सब-4 मीटर एसयूवी
प्लेटफॉर्म
MQB-A0-IN
इंजन
1.0-लीटर TSI
पावर
85 kW (114 PS)
ट्रांसमिशन
6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड ऑटोमैटिक
पूरी पुणे-प्राग यात्रा ऑटोमैटिक वेरिएंट ने पूरी की
रिकॉर्ड बुक में भी दर्ज नाम
काइलैक ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी जगह बनाई है। फास्टेस्ट मल्टी-कार रिले ऑफ ए सिंगल मैन्युफैक्चरर ऑन ए सर्किट श्रेणी में काइलैक, कुशाक, स्लाविया, ऑक्टाविया RS और कोडियाक के साथ स्कोडा ऑटो इंडिया ने 12 मिनट 30.97 सेकंड का संयुक्त समय दर्ज कर देश की सबसे तेज निर्माता फ्लीट का रिकॉर्ड बनाया।
आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक
विशेषज्ञों का मानना है कि काइलैक की यह यात्रा केवल एक ऑटोमोबाइल अभियान नहीं, बल्कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की क्षमता का वैश्विक प्रदर्शन है। भारतीय इंजीनियरिंग से विकसित एक एसयूवी का दो महाद्वीपों और 13 देशों में सफलतापूर्वक चलना इस बात का प्रमाण है कि भारत अब विश्वस्तरीय ऑटोमोबाइल उत्पादों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

