HomeIndian Newsअन्नामलाई बनाम भाजपा: एक ही विचारधारा के दो रास्तों की कहानी

अन्नामलाई बनाम भाजपा: एक ही विचारधारा के दो रास्तों की कहानी

तमिलनाडू में बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई कुप्पुसामी ने भाजपा का साथ छोड़ दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अपना त्यागपत्र सौपा और स्वीकृत हो गया। पार्टी कार्यालय से इस बात की पुष्टि भी हो गई कि के अन्नामलाई ने बीजेपी की अपनी प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दिया है। फिलहाल तमिलनाडू की राजनीति में अन्नामलाई का उनकी ही पार्टी से त्यागपत्र राजनीतिक हलचल से उत्पन्न एक नये अध्याय को आरम्भ कर दिया है।
के अन्नामलाई नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर बीजेपी में आये थे। उन्होंने 2020 में भाजपा का दामन थामा था। इससे पहले वो एक आईपीएस ऑफिसर थे एक निष्ठावान अधिकारी की कार्यशैली के कारण उन्हें सिंघम कहा जाता था। तमिलनाडू में बीजेपी के हिंदु नेतृत्व की विचारधारा का झंडा बुलंद करने में अन्नामलाई का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
एआईएडीएमके से बीजेपी का जुड़ना अन्नामलाई को पसंद नहीं था इसी से पार्टी से राजनीतिक विचारधारा में असंतोष का जन्म हुआ। उनका और भारतीय जनता पार्टी के बीच मतभेद 18 महीने से चल रहा था। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी ने उनको राज्यसभा की सीट की पेशकश की थी पर वो तमिलनाडू की राजनीति में कमान चाहते थे। जबकि बीजेपी इसके लिए तैयार हो ये तो संभव ही नहीं था। कई बार चेहरा पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होता है पर पार्टी ही बड़ी रहती है। हर प्रदेश में नियंत्रण केवल बीजेपी में ही रहता है जिसका नियंत्रण केंन्द्रीय नेतृत्व के पास ही रहता है। अन्नामलाई को अपने हिसाब से कुछ नहीं कर पाने के असंतोष ने पार्टी से उनकी राहें अलग कर दीं उनके मन में बीजेपी के लिए सॉफ्ट कॉर्नर है, कारण दोनों एक ही विचारधारा से जुड़े है पर जिस स्थिति में दोनों को साथ मिलकर तमिलनाडू में राजनीतिक जमीन सुदृढ़ करनी थी वो कारण साथ नहीं बन सका। राजनीति विषमताओं और संभावनाओं का खेल है। स्थितियों की पटकथा तैयार की जाती है। के अन्नामलाई ने अपनी नयी पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है। अन्नामलाई ने कहा कि वो “वी द लीडर” के नाम से एक राजनीतिक अभियान चलायेंगे। राजनीति के प्रारंम्भिक गुण भी लोगों को सिखायेंगे। लोगों को राजनीतिक नेतृत्व के लिये तैयार करेंगे। पार्टी से अलग होकर उन्होंने कहा कि तमिलनाडू के हितों की अनदेखी की गई। अब जब रास्ते अलग हो गये हैं क्या वो उनका ये निर्णय उनकी राजनीतिक भविष्य की वो पटकथा लिख पाएगा जैसा वो चाहते हैं। पहले भी शंकर सिंह बाघेला, केशुभाई पटेल, उमा भारती जैसे कई दिग्गज नेताओं के उदाहरण हैं जो पार्टी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे थे और जब अलग होकर अपनी पार्टी बनाई तो उनके राजनीतिक भविष्य पर ही गहण लग गया। ऐसी भी संभावनाएं हैं कि अन्नामलाई का करिश्माई व्यक्तित्व का चार्म बना रहे और ये तमिलनाडू में बीजेपी के लिए चुनौती साबित हों तब की स्थिति के लिये भी अलग कहानी लिखी जाएगी क्योंकि एक ही विचारधारा और उसमें निष्ठावान एक सुदृढ़ साफ सुथरा नेतृत्व में से जनता किसमें अपना नेता चुनेगी ये समय ही निर्णय करेगा। चुनौती, भाजपा और अन्नामलाई दोनों ही के लिये है। अन्नामलाई के राजनीतिक पार्टी के भविष्य की और भाजपा के लिए समान विचारधारा के ऐसे व्यक्तित्व की जो अधिक प्रखर है पर परिणाम भविष्य के गर्भ में और निर्णय जनता के हाथ में है।

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