HomeIndian Newsभाजपा, एआईएडीएमके और अन्नामलाई: तमिलनाडु में बदलते समीकरणों का विश्लेषण

भाजपा, एआईएडीएमके और अन्नामलाई: तमिलनाडु में बदलते समीकरणों का विश्लेषण

तमिलनाडु की राजनीति में कुछ नया होने को है। भाजपा से रूठे के. अन्नामलाई को पार्टी में नई जिम्मेदारी मिलेगी या राहें अलग होंगी। प्रखर हिंदुवादी नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी अपने मजबूत निर्णय के लिये जाने जाते हैं। जिन विषयों पर उनके विचार नहीं मिलते उनका वो विरोध करते हैं 2024 में वो भाजपा के स्टार प्रचारक रहे थे। अपनी पार्टी से नाराजगी के कारण ही उन्होंने मीडिया से बातचीत में एकबार कहा था कि वो राजनीति में किसी स्वार्थवश नहीं आये हैं जबतक दिल करेगा राजनीति करेंगे नहीं तो गांव जाकर खेती करेंगे। इनदिनों उनके नये पार्टी बनाने के बारे में सुगबुगाहट तेज है इसमें कितनी सच्चाई है ये तो कुछ दिनों में पता चल जाएगा।

नयी पार्टी बनाने की अटकलों के बीच उनका “कृपया प्रतीक्षा करें” वाला बयान कई सवाल खड़े कर रहा है। यह मामला केवल एक नेता के राजनीतिक भविष्य का नहीं, बल्कि तमिलनाडु में भाजपा की रणनीति और एनडीए की राजनीति से भी जुड़ा हुआ है।

दरअसल, अन्नामलाई के नेतृत्व में भाजपा और एआईएडीएमके के रिश्तों में खटास आई थी। अन्नामलाई लगातार एआईएडीएमके नेतृत्व, विशेषकर दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता और पूर्व नेताओं से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसी वजह से दोनों दलों के बीच दूरी बढ़ी और गठबंधन टूट गया।

हालांकि 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा के लिए एआईएडीएमके का साथ महत्वपूर्ण माना गया। इसके बाद एआईएडीएमके ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में वापसी की, लेकिन इसके साथ ही अन्नामलाई को तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष पद से हटाए जाने की चर्चा भी तेज हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि एआईएडीएमके ने भाजपा नेतृत्व के सामने अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की शर्त रखी थी।

अन्नामलाई का बदला हुआ राजनीतिक रुख भी सवालों को जन्म देता है। एक समय भाजपा के सबसे आक्रामक और सक्रिय नेताओं में गिने जाने वाले अन्नामलाई हाल के चुनावी अभियानों में अपेक्षाकृत कम सक्रिय दिखाई दिए। इससे पार्टी और अन्नामलाई के बीच मतभेद का पता चलता है।

अब यदि अन्नामलाई वास्तव में नई राजनीतिक पार्टी बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो इसका सबसे अधिक प्रभाव भाजपा के उस वोट बैंक पर पड़ सकता है, जिसे उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में तमिलनाडु में तैयार किया है। एक पूर्व आईपीएस अधिकारी और आक्रामक हिंदुत्ववादी चेहरे के रूप में उन्होंने युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है।

फिलहाल भाजपा और अन्नामलाई दोनों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन दिल्ली में होने वाली संभावित बैठकों और 4 जून को उनके जन्मदिन के आसपास होने वाले घटनाक्रम पर तमिलनाडु की राजनीति की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि अन्नामलाई भाजपा के भीतर नयी भूमिका निभाएंगे या फिर राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू करेंगे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments