भारत की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर जी के गीतों ने विराम ले लिया है। उनका निधन मुम्बई स्थित उनके आवास पर 89 वर्ष की आयु में हुआ। लता आशा जी के बाद और एक मधुर आवाज ने अलविदा कह दिया। उन्होंने कई भारतीय भाषाओं में गीत को सुर दिये हैं जिनमें हिंदी , अंगिका, भोजपुरी, राजस्थानी , ओड्यिा, बंगाली, मराठी ,असमी, कन्नड़, गुजराती, पंजाबी आदि भाषाओं में अपने मधुर स्वर का जादू बिखेरा। उनकी आवाज की तुलना हमेशा लता मंगेशकर से होती रही। इन दोनों स्वर सम्राज्ञी के स्वर में अन्तर कर पाना बड़ा कठिन था। यह समानता उनके लिए एक चुनौती भी बनी रही। इन्होंने मुहम्मद रफी के साथ 140 डूऐट गाये जिनमें से कई सुपरहिट रहे। पर इनके प्रतिभा को उतना सम्मान नहीं मिला जितना मिलना चाहिये था क्योंकि इनकी गायन शैली और आवाज लता मंगेशकर से मिलती थी। इन्हें वही निर्माता या संगीतकार अप्रोच करते जो लता मंगेशकर का पारिश्रमिक नहीं दे पाते थे। पर उनके गाये गीत सीधा दिल को छू लेते थे।

कई ऐसे सुपरहिट गाने हुये जो उस दौर से अबतक हर मौके पर बजाये जाते रहे। उन्हें उनकी गायकी के लिये पद्मभूषण पुरष्कार दिया गया। स्वर सम्राज्ञी के निधन से जहां संगीत जगत शोक में हैं वहीं राजनीतिक जगत और आम लोगों को भी वो निशब्द कर गयीं। उनके निधन पर प्रधानमंत्री मोदी , महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नितिन गडकरी समेत कई नेताओं ने दुख प्रकट किये हैं। उनके गाये मधुर और प्रसिद्ध गीत हैं ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे , मेरा प्यार भी तू है और बहना ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा है। तुमने पुकारा और हम चले आए ये गीत भुलाये नहीं भूलेंगे। सुमन कल्याणपुर भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी मधुर आवाज और अमर गीत आने वाली पीढ़ियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजते रहेंगे। उनका स्वर भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर बनकर हमेशा जीवित रहेगा।

