आज के समय में कार और बाइक में ट्यूबलेस टायर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि अगर ऐसे टायर में कील या कोई नुकीली चीज घुस जाए तो हवा तुरंत क्यों नहीं निकलती। इसकी वजह ट्यूबलेस टायर की खास बनावट और तकनीक है।
ट्यूबलेस टायर में अलग से ट्यूब नहीं होती। इसमें टायर और रिम मिलकर एक एयरटाइट सिस्टम बनाते हैं। टायर के अंदर एक खास रबर की परत (इनर लाइनर) होती है, जो हवा को बाहर जाने से रोकती है। जब टायर में हवा भरी जाती है, तो उसका दबाव टायर को रिम से कसकर चिपका देता है, जिससे पूरा सिस्टम सील हो जाता है और कहीं से हवा लीक नहीं होती। साथ ही, इसका वाल्व सीधे रिम में लगा होता है, जिससे हवा का अंदर-बाहर जाना नियंत्रित रहता है।
जब किसी ट्यूब वाले टायर में कील लगती है, तो अंदर की ट्यूब तुरंत फट जाती है और हवा तेजी से निकल जाती है। लेकिन ट्यूबलेस टायर में छेद छोटा होता है, इसलिए हवा धीरे-धीरे निकलती है। कई बार कील खुद ही छेद को बंद करने का काम करती है, जिससे लीकेज और भी कम हो जाता है।इसके अलावा, कुछ ट्यूबलेस टायर में सीलेंट का इस्तेमाल होता है, जो छोटे छेद (लगभग 3 से 6 मिमी) को खुद ही भर सकता है।
इससे हवा का रिसाव रुक जाता है या काफी कम हो जाता है।ट्यूबलेस टायर के कई फायदे भी हैं। इनमें अचानक फटने (ब्लास्ट) का खतरा कम होता है। अगर हवा निकल भी रही हो, तो ड्राइवर को गाड़ी संभालने का समय मिल जाता है। हाई स्पीड पर भी बेहतर संतुलन और सुरक्षा मिलती है। छोटे पंचर खुद ही नियंत्रित हो सकते हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना कम हो जाती है।

