अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरान की ओर से बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका की तरफ से उन्हें लगातार संदेश मिल रहे हैं, लेकिन इसे औपचारिक बातचीत नहीं माना जाना चाहिए।एक इंटरव्यू में अराघची ने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ के माध्यम से संदेश पहुंच रहे हैं।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान इन संदेशों को किसी बातचीत या वार्ता की प्रक्रिया नहीं मानता। उनका कहना है कि यह सिर्फ संचार है, कोई आधिकारिक संवाद नहीं।ईरान का दावा है कि उसने अमेरिका की ओर से दिए गए किसी भी प्रस्ताव पर न तो जवाब दिया है और न ही कोई शर्त रखी है। अराघची ने कहा कि उनका देश क्षेत्र में शांति चाहता है, लेकिन केवल अस्थायी युद्धविराम के पक्ष में नहीं है। उनका जोर स्थायी समाधान और सुरक्षा गारंटी पर है।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच संदेश आमतौर पर विदेश मंत्रालयों या सुरक्षा एजेंसियों के जरिए भेजे और प्राप्त किए जाते हैं। साथ ही, उन्होंने अमेरिका के साथ पिछले अनुभवों को भी नकारात्मक बताया और संकेत दिया कि भरोसे की कमी अभी भी बनी हुई है।ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी कहा कि उनका देश युद्ध को लंबा नहीं खींचना चाहता। उन्होंने साफ किया कि किसी भी समझौते के लिए ईरान की सुरक्षा और भविष्य में हमलों की रोकथाम की गारंटी जरूरी है।
वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है। उनके अनुसार, अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था, और इस दिशा में लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है।कुल मिलाकर, दोनों देशों के बीच सीधे वार्ता भले ही नहीं हो रही हो, लेकिन बैक-चैनल कम्युनिकेशन यानी परोक्ष रूप से संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। यही माध्यम फिलहाल इस तनावपूर्ण स्थिति में संवाद का एकमात्र रास्ता बना हुआ है।

