मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर अब वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के बीच अब ऊर्जा से जुड़े ठिकाने भी निशाने पर आने लगे हैं। हाल ही में कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित एक बड़े गैस प्लांट पर मिसाइल हमला हुआ, जिससे वहां आग लग गई और उत्पादन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।
बताया जा रहा है कि यह हमला ऐसे समय हुआ जब इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया था। इसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी थी कि उनके ऊर्जा केंद्र भी खतरे में आ सकते हैं।कतर दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) सप्लायर देशों में गिना जाता है।
ऐसे में वहां उत्पादन प्रभावित होने का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।भारत के लिए यह स्थिति इसलिए ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि देश अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। कुल आयातित गैस में लगभग आधा हिस्सा कतर से आता है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका भी महत्वपूर्ण सप्लायर हैं।
यदि कतर में उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो भारत को अन्य देशों से महंगी गैस खरीदनी पड़ सकती है। इसका असर सीधे तौर पर आम लोगों पर पड़ सकता है, खासकर रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में।इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री सप्लाई भी प्रभावित हो रही है, जिससे गैस टैंकरों की आवाजाही पर दबाव बढ़ रहा है।हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन यदि मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था और आम जीवन पर पड़ सकता है।

