मराठा आरक्षण को लेकर एक बार फिर आंदोलन तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। मराठा समाज के नेता मनोज जरांगे पाटील ने दोबारा मार्च निकालने की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि आरक्षण की मांग को लेकर बड़ी संख्या में लोग मुंबई की ओर कूच करने की तैयारी में हैं।
इस बीच देवेंद्र फडणवीस सरकार पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। मनोज जरांगे पाटील ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर सरकार अपने वादों से पीछे हटती है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने पहले जो आश्वासन दिए थे, उन्हें पूरा नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार मराठा समुदाय को आरक्षण देने के पक्ष में नहीं है, तो संबंधित आदेश जारी नहीं किए जाने चाहिए थे। अब इस मुद्दे को लेकर राज्य में फिर से बड़ा आंदोलन खड़ा होने की संभावना जताई जा रही है।
1. अधूरा वादा और भरोसे की कमीमराठा समाज को पहले सरकार की तरफ से आरक्षण को लेकर आश्वासन मिला था, लेकिन ज़मीनी स्तर पर पूरी तरह लागू नहीं हुआ। इसी वजह से मनोज जरांगे पाटील और उनके समर्थक मानते हैं कि सरकार ने वादा पूरा नहीं किया।
2. OBC कोटे में शामिल करने की मांगमराठा समाज की बड़ी मांग है कि उन्हें OBC (Other Backward Classes) में शामिल किया जाए।लेकिन यह आसान नहीं है क्योंकि इससे पहले से OBC में शामिल समुदायों का विरोध भी सामने आता है।
3. कानूनी अड़चनेंपहले भी मराठा आरक्षण को लेकर कानून बना, लेकिन Supreme Court of India ने उसे रद्द कर दिया था (50% आरक्षण सीमा के कारण)।इसलिए सरकार के लिए नया रास्ता निकालना मुश्किल हो गया है।
4. हैदराबाद गजट और कुनबी प्रमाणपत्र विवादजरांगे पाटील का कहना है कि पुराने रिकॉर्ड (हैदराबाद गजट) के आधार पर मराठों को कुनबी (OBC वर्ग) साबित किया जा सकता है।लेकिन इस पर अभी तक पूरी तरह सहमति या लागू करने का निर्णय नहीं हुआ है।
5. राजनीतिक दबावदेवेंद्र फडणवीस सरकार पर अब दबाव है कि वो कोई ठोस फैसला ले।अगर फैसला नहीं आता, तो आंदोलन और बड़ा हो सकता है।

