ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि खामेनेई शिया समुदाय के प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेता थे और उनकी हत्या से क्षेत्र में तनाव बढ़ना स्वाभाविक है।
उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई को अमानवीय और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया तथा भारत सरकार से इसकी निंदा करने की मांग की।ओवैसी ने कहा कि यह हमला रमजान के पवित्र महीने में किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब जेनेवा में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत जारी थी, उसी दौरान सैन्य कार्रवाई कर वार्ता की प्रक्रिया को रोक दिया गया। उनके अनुसार, इस कदम से पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया इजरायल यात्रा का जिक्र करते हुए ओवैसी ने सवाल उठाया कि ऐसे संवेदनशील समय में यह दौरा कितना उचित था। उन्होंने कहा कि अगर पहले से हालात की जानकारी थी तो यात्रा पर पुनर्विचार होना चाहिए था, और यदि जानकारी नहीं थी तो यह कूटनीतिक चूक मानी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की पारंपरिक संतुलित विदेश नीति को बनाए रखना जरूरी है।
ओवैसी ने पश्चिम एशिया में काम कर रहे बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता जताई। उनका कहना था कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर तेल की कीमतों, व्यापार और वहां रह रहे भारतीयों पर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान रक्षा और व्यापार से जुड़े कई समझौतों पर चर्चा हुई थी। इसके कुछ ही समय बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर हमला किया, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। भारत सरकार ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हैं और भारत की विदेश नीति को लेकर बहस भी जारी है।

