आज हम आपको बताएंगे कि भारतीय टीम को किन-किन चीजों का फायदा हुआ है! दरअसल, हाल ही में भारतीय टीम द्वारा T20 विश्व कप अपने नाम कर लिया गया है! जिसके बाद कई खबरें उठ रही है! जानकारी के लिए बता दें कि कुशल नेतृत्व और कौशलपूर्ण खिलाड़ी जब एक ही गोल को पाने के लिए पूरी तैयारी के साथ एकजुट होते हैं तो जाकर एक चैंपियन टीम तैयार होती है। कुछ इसी तर्ज पर भारतीय क्रिकेट टीम भी तैयार हुई जिसने ‘विश्व विजेता’ का खूबसूरत तमगा हासिल किया। इस चैंपियन भारतीय टीम के हरेक खिलाड़ी ने अपनी भूमिका के साथ न्याय करते हुए आईसीसी टूर्नामेंट में एक दशक से ज्यादा भारत के खिताबी सूखे को खत्म किया। भारत बिना कोई मैच गंवाए मेंस टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाला पहला देश भी बना। भारत टी20 वर्ल्ड कप दूसरी बार जीतने वाली तीसरी टीम भी बना। वेस्टइंडीज और इंग्लैंड ऐसा पहले कर चुके हैं। नौ खिलाड़ी दो टी20 वर्ल्ड कप फाइनल जीत का हिस्सा रह चुके हैं। रोहित भी इस लिस्ट में शामिल हुए। आईपीएल में कप्तान के तौर पर सफलता को देखते हुए जब रोहित को टीम इंडिया की कमान थमाई गई। लोग उनकी कप्तानी पर चर्चा कर रहे थे और रोहित एक लीडर के तौर पर टीम के प्लेयर्स की अगुआई कर रहे थे। उनकी अगुआई में टीम ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप और वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई, हालांकि खिताब से वह चूक गई। रोहित समझ गए थे कि उनकी तैयार की गई टीम को एक और प्रयास की जरूरत है और इसलिए उन्होंने फिर से टी20 फॉर्मेट में वापसी की और टीम को बेखौफ होकर खिताब जीतने का हौसला दिया। जीत में रोहित ने बल्ले से भी पूरा योगदान दिया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 92 रन की पारी खेल कर उन्होंने टीम इंडिया के सबसे बड़े खतरे को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखाया, वर्ना फाइनल में ऑस्ट्रेलियाई टीम होती तो कहानी दूसरी भी हो सकती थी।
आईपीएल में ओपनर के तौर पर धमाकेदार प्रर्दशन के बाद टीम मैनेजमेंट ने वर्ल्ड कप में विराट कोहली को ओपनिंग पोजिशन पर उतारने का फैसला किया। इससे मिडल ऑर्डर में शिवम दुबे को भी शामिल करने का विकल्प बना। फाइनल से पहले विराट ओपनिंग में पूरी तरह से फ्लॉप रहे। पहली दूसरी गेंद से ही अटैक करने और हवाई शॉट खेलने की उनकी रणनीति बैकफायर कर गई। एक बार फिर टी20 खेल में उनकी प्रासंगिकता पर सवाल खड़े होने लगे। तभी उन्होंने खिताबी मुकाबले में अपने टी20 करियर की सबसे अहम पारी खेल डाली, जिसने टीम इंडिया की जीत की नींव रखी। भयावह दुर्घटना के बाद किसी ने भी कल्पना नहीं की थी कि ऋषभ पंत इतनी जल्दी मैदान पर लौटेंगे। लेकिन वह लौटे और उनका यह 2.0 वर्जन विपक्षी टीमों के लिए और भी परेशानी पैदा करने वाला रहा। पंत ने इस वर्ल्ड कप सबसे बड़ी 42 रन की पारी पाकिस्तान के खिलाफ सबसे बड़े मुकाबले में खेली। पाकिस्तान के खिलाफ वह दूसरे ही ओवर में आए और दबाव भरे माहौल में जुझारू पारी खेलकर सबसे बडे़ मुकाबले में जीत की नींव रखी।
खिताबी जीत में यदि प्लेयर्स के योगदान की बात होगी तो फाइनल में सूर्यकुमार का द्वारा बाउंड्री पर लिया गया डेविड मिलर का कैच सबसे ऊपर आएगा। उस चमत्कारिक कैच के अलावा इस बल्लेबाज ने इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में मुश्किल वक्त में कप्तान का साथ देते हुए 47 रन की तेज पारी खेली। उससे पहले अफगानिस्तान और अमेरिका के खिलाफ दो आकर्षक अर्धशतकीय पारी से टीम की जीत में भूमिका निभाई। अमेरिका जाने से पहले अक्षर की पहचान उस दूसरे विकल्प वाले स्पिनर की थी जो थोड़ी बल्लेबाजी भी कर सकता है। लेकिन वह आज जब वह लौट रहे हैं तो उनकी पहचान एक कंप्लीट ऑलराउंडर की है जो खेल के हर विभाग में मैच विनर है। फाइनल मैच में तीन विकेट गिरने के बाद अक्षर का बैटिंग ऑर्डर में ऊपर आना मास्टर स्ट्रोक रहा। इस लेफ्टी बैटर ने मुश्किल वक्त में काउंटर अटैक करते हुए 47 रन जोड़े और टीम को मैच में बनाए रखा।
टीम इंडिया में शिवम दुबे का शामिल किया जाना सरप्राइज की तरह था। स्पिनर्स पर बड़े शॉट्स लगाने की उनकी ताकत ने उन्हें फेवरिट बनाया, हालांकि जो कमाल आईपीएल में वह कर रहे थे वैसा कमाल वर्ल्ड कप में नहीं कर सके। इसके बावजूद कप्तान ने भरोसा बनाए रखा और फाइनल में भी उन्हें एकादश में रखा। इस अहम मैच में शिवम के अंतिम ओवर्स में 16 गेंद पर बनाए गए 27 रन ने बड़ा फर्क पैदा किया। जैसा की IPL में खराब प्रदर्शन के बाद भी मैनेजमेंट ने इस ऑलराउंडर को टीम में शामिल किया। हार्दिक ने भी अपने प्रदर्शन से साबित किया कि भारत में फिलहाल उनका कोई दूसरा विकल्प नहीं। फाइनल मैच में अंतिम ओवर में सिर्फ आठ रन देकर जीत दिलाने वाले हार्दिक का बैटिंग ऐवरेज भारतीयों में बेस्ट रहा। 150 प्लस की स्ट्राइक रेट से रन बनाने वाले केवल दूसरे बैटर रहे और टीम के तीसरे हाईएस्ट विकेट टेकर भी रहे।
जसप्रीत बुमराह टीम इंडिया की लाइफ लाइन रहे। ऑन डिमांड विकेट चटकाना इनकी खूबी है और इसको उन्होंने बखूबी निभाया। पूरे टूर्नामेंट में जब-जब कप्तान ने उनसे विकेट की मांग की उन्होंने पूरी की। खिताबी मुकाबले में 18वें ओवर में मार्को यानसेन और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में ट्रेविस हेट का विकेट सबसे खास रहा। अहम मोड़ पर इन विकेटों ने विपक्षी टीमों को बैकफुट पर भेजा और टीम इंडिया की जीत का रास्ता खोला।

