नई दिल्ली। 13 अप्रैल को न्यूनतम पारिश्रमिक की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों के मामले में उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस से जवाब तलब किया है। प्रदर्शन के दौरान हिंसा और आगजनी की घटनाएं भी सामने आई थीं, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आदित्य आनंद और रूपेश रॉय को आरोपी बनाया था।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपी इंजीनियर आदित्य आनंद मजदूरों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए समझा रहे थे। इसके समर्थन में तीन वीडियो भी अदालत के समक्ष पेश किए गए।
मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया कि दोनों आरोपियों आदित्य आनंद और रूपेश रॉय को 18 मई को दोपहर 2 बजे अदालत में पेश किया जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि मजदूर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर सकते हैं, वे “आतंकवादी नहीं” हैं। कोर्ट की इस टिप्पणी को श्रमिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

