भारत में नागरिकों को देश के किसी भी हिस्से में आने-जाने की स्वतंत्रता है, लेकिन एक स्थान ऐसा भी है जहां प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है — नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड! यह द्वीप अंडमान और निकोबार के अंतर्गत आता है और बंगाल की खाड़ी में स्थित है। यहां भारतीयों सहित किसी भी बाहरी व्यक्ति के जाने पर सख्त रोक है।
क्यों है प्रतिबंध?
सरकार ने इस क्षेत्र को विशेष रूप से संरक्षित घोषित किया है। नियमों के तहत द्वीप और इसके आसपास लगभग 5 से 9 किलोमीटर तक का क्षेत्र प्रतिबंधित दायरे में आता है। इस इलाके की निगरानी सुरक्षा एजेंसियां करती हैं और बिना अनुमति प्रवेश करना गैरकानूनी है। नियम तोड़ने पर गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
सेंटिनली जनजाति की सुरक्षा
इस द्वीप पर सेंटिनली जनजाति निवास करती है, जिसे दुनिया की सबसे अलग-थलग और संवेदनशील आदिवासी समुदायों में गिना जाता है। माना जाता है कि यह समुदाय हजारों वर्षों से बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह कटा हुआ है। बाहरी लोगों के संपर्क की कोशिशों पर जनजाति ने कई बार आक्रामक प्रतिक्रिया दी है।पूर्व में कुछ घटनाएं भी सामने आई हैं, जब मछुआरे या विदेशी नागरिक द्वीप के पास पहुंचे और उन पर हमला हुआ। इन घटनाओं के बाद सरकार ने निगरानी और सख्त कर दी है। राजधानी पोर्ट ब्लेयर से भी इस क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस जनजाति में आधुनिक बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम हो सकती है। ऐसे में बाहरी संपर्क से मामूली संक्रमण भी उनके अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसलिए यह प्रतिबंध केवल बाहरी लोगों की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि जनजाति की रक्षा और उनके प्राकृतिक जीवन को सुरक्षित रखने के लिए भी लगाया गया है।ऊपर से देखने पर यह द्वीप घने जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर दिखाई देता है, लेकिन वहां की जनजाति बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करती। यही कारण है कि North Sentinel Island को भारत के सबसे सख्त प्रतिबंधित क्षेत्रों में गिना जाता है।

