Tuesday, February 10, 2026
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बीजेपी और आरएसएस को लेकर क्या बोले मोहन भागवत?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मुंबई में हुए एक कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बीजेपी, समाज और राष्ट्र से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की।बीजेपी को लेकर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि पार्टी के “अच्छे दिन” संघ की वजह से आए हैं, न कि इसके उलट। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि RSS इस आंदोलन के प्रति पूरी तरह समर्पित था और जिन लोगों ने इसका साथ दिया, उन्हें राजनीतिक लाभ मिला। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ के अपने अच्छे दिन स्वयंसेवकों की निरंतर मेहनत और विचारधारा के प्रति निष्ठा का परिणाम हैं।

क्या बोले मोहन?

जाति के मुद्दे पर संघ प्रमुख ने साफ कहा कि सरसंघचालक का पद किसी खास जाति के लिए तय नहीं है। अनुसूचित जाति या जनजाति से आने वाले व्यक्ति भी इस पद पर आसीन हो सकते हैं और ब्राह्मण होना कोई अतिरिक्त योग्यता नहीं है। उन्होंने माना कि शुरुआती दौर में संघ में ब्राह्मणों की संख्या अधिक थी, लेकिन आज संघ हर जाति और वर्ग के लोगों के साथ समान रूप से काम कर रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर फैली धारणाओं पर भी मोहन भागवत ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि नरेंद्र मोदी “आरएसएस से आए प्रधानमंत्री” हैं। मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं और उनकी राजनीतिक पहचान भारतीय जनता पार्टी से है, जो RSS से अलग संगठन है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी सहित समाज के कई क्षेत्रों में संघ के स्वयंसेवक सक्रिय हैं।देश और समाज की भूमिका पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि भारत एक प्राचीन और समृद्ध सभ्यता है। यदि भारत मजबूत और महान बनेगा, तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस देश के लोगों का आचरण ऐसा होना चाहिए कि विदेशी लोग यहां आकर जीवन मूल्यों को समझ सकें। एक शक्तिशाली राष्ट्र के लिए एकजुट, नैतिक और समावेशी समाज जरूरी है, जिसमें कोई भी वर्ग पीछे न छूटे।भाषा को लेकर संघ प्रमुख ने कहा कि भारत की अपनी सांस्कृतिक पहचान है और अंग्रेजी RSS की मूल कार्यभाषा नहीं हो सकती क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। हालांकि, जहां जरूरत होती है वहां अंग्रेजी का उपयोग किया जाता है। उन्होंने साफ किया कि संघ किसी भाषा का विरोध नहीं करता, लेकिन मातृभाषा और हिंदी को प्राथमिकता देना आवश्यक है।संघ को लेकर फैलने वाली गलतफहमियों पर मोहन भागवत ने कहा कि किसी भी नए कार्य को लेकर भ्रम पैदा होना सामान्य बात है और कई बार यह जानबूझकर भी फैलाया जाता है। RSS के साथ भी ऐसा हुआ है, लेकिन समय के साथ सच्चाई सामने आती है और भ्रम खत्म हो जाता है। अब संघ ज्यादा पारदर्शिता के साथ लोगों तक अपनी जानकारी पहुंचा रहा है और आउटरीच कार्यक्रमों के जरिए अपने कार्यों को साझा कर रहा है।फंडिंग के सवाल पर उन्होंने बताया कि संघ पूरी तरह स्वयंसेवकों के सहयोग से चलता है। संघ कार्यकर्ता यात्रा के दौरान होटल या रेस्तरां में ठहरने के बजाय स्वयंसेवकों के घर रुकते हैं और वही भोजन ग्रहण करते हैं।धर्मांतरण और ‘घर वापसी’ के मुद्दे पर संघ प्रमुख ने कहा कि सभी धर्मों और विचारों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन गलत है। ऐसे मामलों में लोगों को उनकी इच्छा के अनुसार मूल धर्म में लौटने का अवसर मिलना चाहिए। वहीं अवैध प्रवासियों को लेकर उन्होंने सरकार से अपील की कि उनकी पहचान कर उन्हें देश से बाहर किया जाए और देश में व्यापार और संसाधनों पर पहला अधिकार भारतीयों का होना चाहिए, चाहे वे किसी भी धर्म से हों।

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