Tuesday, March 10, 2026
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क्या कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों पर कसा शिकंजा?

जस्टिन ट्रूडो के सत्ता से बाहर होने के बाद भारत और कनाडा के संबंधों में तेजी से सुधार देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है और सुरक्षा सहयोग अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होता दिख रहा है। इसी बदलाव के बीच कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी तत्वों के लिए हालात मुश्किल होते दिखाई दे रहे हैं।भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल हाल ही में कनाडा के दौरे पर पहुंचे, जहां उनकी मौजूदगी में दोनों देशों के बीच सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान अजीत डोभाल ने कनाडा के नेशनल सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस एडवाइजर के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय की डिप्टी क्लर्क नथाली ड्रोइन से भी मुलाकात की।

बैठक में क्या बोले डोभाल?

बैठक के बाद भारत और कनाडा राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून प्रवर्तन और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने के लिए एक साझा वर्क प्लान पर सहमत हुए। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह बातचीत दोनों देशों के बीच चल रही नियमित द्विपक्षीय सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा थी। बैठक में नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी पहलों की अब तक हुई प्रगति की समीक्षा भी की गई।दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग को दिशा देने के लिए एक स्पष्ट कार्ययोजना अपनाने पर सहमति जताई, जिससे द्विपक्षीय संवाद को बेहतर बनाया जा सके और संवेदनशील मुद्दों पर समय रहते सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सके। इसमें ड्रग तस्करी, विशेष रूप से फेंटानिल के प्रीकर्सर, और अंतरराष्ट्रीय संगठित आपराधिक नेटवर्क जैसे गंभीर विषय शामिल हैं।भारत और कनाडा ने यह भी तय किया कि दोनों देश सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन से जुड़े संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति करेंगे। इसके अलावा, संबंधित एजेंसियां अपने मौजूदा सहयोग को और मजबूत करेंगी ताकि जमीनी स्तर पर समन्वय बेहतर हो सके।साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर भी दोनों देशों ने सहयोग को औपचारिक रूप देने और साइबर खतरों से जुड़ी जानकारी साझा करने पर सहमति जताई है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों पक्ष अपने-अपने घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों के तहत धोखाधड़ी और इमिग्रेशन से जुड़े मामलों में सहयोग पर बातचीत जारी रखने के लिए भी तैयार हैं।भारत और कनाडा पहले से ही आतंकवाद विरोधी कदमों, कानून प्रवर्तन सहयोग और उभरते सुरक्षा खतरों को लेकर संस्थागत तंत्र बनाए हुए हैं। बीते कुछ वर्षों में दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध और एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने के लिए संरचित और नियमित संवाद की जरूरत पर लगातार जोर दिया है।

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