अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि यदि परमाणु मुद्दे पर सार्थक समझौता नहीं हुआ तो गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा।
बताया जा रहा है कि ट्रंप ने अपने शीर्ष सलाहकारों के साथ उच्चस्तरीय बैठक के बाद ईरान को लगभग 10 दिनों के भीतर परमाणु कार्यक्रम पर ठोस निर्णय लेने का संकेत दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में हुई है, लेकिन अंतिम समझौता जरूरी है। अमेरिकी प्रशासन के भीतर यह भी चर्चा है कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे तो सैन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
सैन्य शक्ति बढ़ाई
इस बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्नत लड़ाकू विमान जैसे F-22 Raptor और F-35 Lightning II तैनात किए गए हैं। साथ ही विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln और USS Gerald R. Ford को भी क्षेत्र में सक्रिय किया गया है। अतिरिक्त फाइटर जेट और ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों की तैनाती की भी खबर है।दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei ने कहा है कि ईरान पहले हमला नहीं करेगा, लेकिन यदि उस पर हमला हुआ तो वह जवाब देने में संकोच नहीं करेगा।
उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय संघर्ष भड़क सकता है।इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी चेतावनी दी है कि यदि ईरान की ओर से कोई हमला हुआ तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ब्रिटेन ने अपने सैन्य ठिकानों के संभावित उपयोग को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। वहीं, संभावित हमले की आशंका के बीच ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र में NOTAM जारी कर नो-फ्लाई जोन लागू कर दिया है।कुल मिलाकर, कूटनीतिक बातचीत और सैन्य तैयारी के बीच हालात संवेदनशील बने हुए हैं।

