भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर हाल ही में एक अहम जानकारी सामने आई है। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से सीधी और स्पष्ट बातचीत की थी। इस बातचीत को दोनों देशों के बीच जमी बर्फ पिघलाने में अहम माना जा रहा है।
रिपोर्ट में क्या कहा?
बताया जा रहा है कि यह बातचीत उस समय हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं। इन तस्वीरों के सामने आते ही उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप असहज नजर आए थे। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अजीत डोभाल को विशेष संदेश के साथ वॉशिंगटन भेजा था।बैठक से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, डोभाल ने अमेरिकी विदेश मंत्री को साफ शब्दों में बताया कि भारत अमेरिका के साथ रिश्तों में आई तल्खी को पीछे छोड़कर दोबारा संवाद और समझौते की राह पर चलना चाहता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत किसी भी तरह के दबाव में फैसले नहीं करेगा और जरूरत पड़ी तो मौजूदा अमेरिकी नेतृत्व का कार्यकाल खत्म होने तक इंतजार करेगा।डोभाल ने यह भी कहा कि भारत पहले भी अमेरिकी प्रशासन के कठिन रवैये का सामना कर चुका है और अब वह सम्मानजनक और संतुलित रिश्ते चाहता है। उन्होंने अमेरिकी पक्ष से यह अपेक्षा जताई कि भारत को लेकर सार्वजनिक मंचों पर की जाने वाली तीखी टिप्पणियों में कमी लाई जाए, ताकि दोनों देशों के संबंध सामान्य हो सकें।उस समय भारत अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ और ट्रंप की कठोर टिप्पणियों से नाराज था। ट्रंप ने भारत को ऊंचे टैरिफ वाली अर्थव्यवस्था बताया था और रूस से तेल खरीदने को लेकर भी आरोप लगाए थे।हालांकि, हालात अब बदलते नजर आ रहे हैं। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक व्यापार समझौता हुआ है, जिसके तहत भारत से आने वाले सामान पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह दर एशिया के कई अन्य देशों की तुलना में कम है।अमेरिकी विदेश विभाग ने इस मुलाकात पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि कूटनीतिक परंपरा के तहत निजी बातचीत का विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाता।

