नई दिल्ली। जनजातीय कार्य मंत्रालय की योजनाओं के माध्यम से देशभर की आदिवासी महिलाओं को आजीविका, उद्यमिता और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने राज्यसभा में बताया कि मंत्रालय, ट्राइफेड (TRIFED) के माध्यम से प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन (PMJVM) और प्रधानमंत्री जनमन (PM-JANMAN) योजनाओं का संचालन कर रहा है। इन योजनाओं के तहत वन धन विकास केंद्र (VDVK) स्थापित कर जनजातीय समुदायों, विशेष रूप से महिलाओं, को प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उद्यमों से जोड़ा जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन के अंतर्गत प्रत्येक वन धन विकास केंद्र में 20 लाभार्थियों वाले 15 स्वयं सहायता समूह (SHG) शामिल किए जाते हैं, जबकि प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत प्रत्येक केंद्र में 10 लाभार्थियों वाले 5 स्वयं सहायता समूह गठित किए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि PMJVM योजना के अंतर्गत देश के 28 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 4,172 वन धन विकास केंद्रों को मंजूरी दी गई है, जिनसे 12.48 लाख लाभार्थी, जिनमें बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं भी शामिल हैं, जुड़े हुए हैं। वहीं PM-JANMAN योजना के तहत 18 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 540 वन धन विकास केंद्रों को स्वीकृति दी गई है, जिनसे 46 हजार से अधिक लाभार्थी जुड़े हैं।
सरकार के अनुसार, अब तक 2,922 वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से 7.13 लाख लाभार्थियों को लघु वन उपज (एमएफपी), कृषि उत्पादों के सतत संग्रहण, प्राथमिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन संबंधी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इससे आदिवासी समुदायों की कौशल क्षमता और बाजार से जुड़ाव दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 3,406 वन धन विकास केंद्र सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। इन केंद्रों ने स्थानीय बाजारों, मेलों और भारत जनजाति उत्सव (BTF) के माध्यम से लगभग 174 करोड़ रुपये मूल्य के मूल्यवर्धित उत्पादों की बिक्री की है। इससे जनजातीय समुदायों की आय में वृद्धि हुई है, स्थायी आजीविका के अवसर विकसित हुए हैं और विशेष रूप से आदिवासी महिलाओं में उद्यमिता को नई मजबूती मिली है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य जनजातीय महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देना और उन्हें स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।
यह जानकारी जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

