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अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच बढ़ा तनाव, ट्रंप की चेतावनी पर तेहरान का तीखा जवाब

दावोस/तेहरान। पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की कोशिशों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। स्विट्जरलैंड के दावोस में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच जारी बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा तथा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए आमने-सामने बैठे हैं। इस वार्ता में पाकिस्तान और क़तर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि कूटनीतिक बातचीत के समानांतर दोनों देशों के बीच बयानबाजी का दौर भी तेज हो गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान लेबनान में हिजबुल्ला की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए कदम नहीं उठाता है, तो अमेरिका उससे भी अधिक कठोर कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि ईरान को अपने सहयोगी समूहों को क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने से रोकना चाहिए, अन्यथा उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

ट्रंप की इस चेतावनी पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के वरिष्ठ नेता और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ ने कहा कि उनका देश अमेरिकी धमकियों से भयभीत नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी दबाव और धमकियां प्रभावी होतीं तो आज वाशिंगटन को ऐसी परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता। ग़ालिबफ़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं किसी भी संभावित चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ग़ालिबफ़ का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच हाल ही में घोषित संघर्षविराम के बाद पहली बार प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हो रही है।

हुर्मज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता

वार्ता के बीच एक और मुद्दा चर्चा में आ गया है। इज़राइल और लेबनान के बीच बढ़ते तनाव का हवाला देते हुए ईरान की ओर से हुर्मज जलडमरूमध्य को लेकर कड़े संकेत दिए गए हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पूरी तरह खुला है और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है।

हुर्मज जलडमरूमध्य से जुड़ी खबरों का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और ऊर्जा आयातक देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

कूटनीति के मंच पर दिखी दूरी

दावोस में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक की शुरुआत भी कूटनीतिक तनाव के संकेतों के साथ हुई। सूत्रों के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ सार्वजनिक रूप से हाथ मिलाने और संयुक्त तस्वीर खिंचवाने से इनकार कर दिया। इसे अमेरिका के प्रति तेहरान के सख्त रुख के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

यही नहीं, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस पाकिस्तान और क़तर के नेताओं के साथ मीडिया को संबोधित कर रहे थे, तब ईरानी प्रतिनिधियों ने उस मंच से दूरी बनाए रखी। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान वैश्विक मीडिया के सामने अमेरिका को एकतरफा संदेश देने का अवसर नहीं देना चाहता था।

हालांकि तनावपूर्ण माहौल के बीच कुछ सकारात्मक संकेत भी देखने को मिले। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच हुई गर्मजोशी भरी मुलाकात ने यह संदेश दिया कि तेहरान क्षेत्रीय संवाद और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने के पक्ष में है।

दुनिया की नजर वार्ता के नतीजों पर

अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब पूरा पश्चिम एशिया कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रहा है। एक ओर दोनों देश बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर तीखे बयान और जवाबी चेतावनियां क्षेत्र में नए संकट की आशंकाओं को भी जन्म दे रही हैं।

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि दावोस में चल रही यह वार्ता किसी ठोस समझौते तक पहुंचती है या फिर बढ़ती बयानबाजी पश्चिम एशिया को एक बार फिर बड़े टकराव की ओर धकेल देती है।

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