पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पशुवध और बकरीद के अवसर पर कुर्बानी को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने गाय, बीमार और कम उम्र के जानवरों की कुर्बानी पर रोक लगाने के साथ यह भी स्पष्ट किया है कि बिना वैध प्रमाण पत्र किसी भी पशु का वध नहीं किया जा सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कई मुस्लिम संगठनों ने इसे धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है। इसी बीच मुर्शिदाबाद से विधायक और AJUP के राष्ट्रीय अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को चेतावनी देते हुए कहा कि धार्मिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर कुर्बानी पर रोक लगाने की कोशिश की गई तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। कबीर ने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय इस मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि बकरीद पर गायों की कुर्बानी होगी, चाहे सरकार कुछ भी कर ले। उनके इस बयान के बाद विवाद और बढ़ गया है। कुछ मुस्लिम संगठनों ने भी हुमायूं कबीर का समर्थन करते हुए कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है और किसी भी समुदाय की परंपराओं को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

