नई दिल्ली। विदेशी दौरे से लौटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 मई को प्रधानमंत्री आवास पर एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सभी कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्रियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
यह बैठक पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष और उसके भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर बुलाई गई है। माना जा रहा है कि बैठक में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने पहले ही विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति का गठन कर दिया था, जिसे युद्ध की स्थिति से उत्पन्न होने वाले प्रभावों का आकलन करने और उससे निपटने के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। यह समिति अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है, जिस पर बैठक में विचार किया जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि पश्चिमी एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों, व्यापारिक गतिविधियों और वैश्विक बाजारों पर असर पड़ सकता है। भारत का इस क्षेत्र के देशों के साथ ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में गहरा संबंध है, इसलिए सरकार किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए पहले से रणनीति तैयार करना चाहती है।
बैठक में विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से भी हालात की विस्तृत जानकारी ली जा सकती है। इसके साथ ही पश्चिमी एशिया में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर उन्हें वापस लाने की संभावित योजना पर भी चर्चा होने की संभावना है।
राजनीतिक और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक आने वाले समय में केंद्र सरकार की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों की दिशा तय कर सकती है। सरकार की कोशिश है कि वैश्विक तनाव के इस दौर में भारत के आर्थिक और सामरिक हित पूरी तरह सुरक्षित रहें।

