भारत की सैन्य ताकत में बड़ा इजाफा, DRDO ने किया अग्नि MIRV और ग्लाइड वेपन सिस्टम का सफल परीक्षण
नई दिल्ली/चांदीपुर। भारत ने अपनी सामरिक शक्ति का बड़ा प्रदर्शन करते हुए शुक्रवार को ओडिशा तट के पास स्वदेशी रूप से विकसित ग्लाइड हथियार तंत्र और अग्नि MIRV इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का सफल परीक्षण कर दुनिया को स्पष्ट संदेश दे दिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा किए गए इस परीक्षण को भारत की रणनीतिक क्षमता में ऐतिहासिक छलांग माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर परीक्षण रेंज से किया गया, जहां अग्नि मिसाइल ने तय लक्ष्य को पूरी सटीकता के साथ भेदा। इस दौरान स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम का भी पहला सफल परीक्षण किया गया, जिसे भविष्य के युद्धों में गेमचेंजर तकनीक माना जा रहा है।
क्या है MIRV तकनीक?
MIRV यानी “मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल” ऐसी तकनीक है, जिसमें एक ही मिसाइल कई परमाणु हथियार लेकर अलग-अलग लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकती है। इस तकनीक के सफल परीक्षण के साथ भारत अब उन चुनिंदा शक्तिशाली देशों की श्रेणी में और मजबूती से खड़ा हो गया है, जिनके पास उन्नत परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मौजूद है।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तकनीक दुश्मन की मिसाइल डिफेंस प्रणाली को भी भेदने में सक्षम मानी जाती है। इससे भारत की “सेकेंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी” को नई मजबूती मिलेगी।
अग्नि-6 को लेकर बढ़ी हलचल
इस परीक्षण के बाद अग्नि-6 मिसाइल कार्यक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि अग्नि-6 भारत की अब तक की सबसे अत्याधुनिक और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल होगी, जो कई हजार किलोमीटर दूर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम होगी।
पिछले महीने एएनआई राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन 2.0 में DRDO प्रमुख समीर वी. कामत ने कहा था कि अग्नि-6 कार्यक्रम सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा था, “सरकार की मंजूरी मिलते ही हम पूरी तरह तैयार हैं।”
चीन-पाकिस्तान को सख्त संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब भारत लगातार अपनी सामरिक ताकत बढ़ाने पर जोर दे रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र और एशिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच भारत का यह कदम चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए बड़ा रणनीतिक संदेश माना जा रहा है।

