प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में मलेशिया दौरे के दौरान अपने संबोधन के जरिए भारत, खासकर तमिलनाडु से एक गहरा सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव दिखाया। कुआलालंपुर में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी की बातों में तमिल भाषा, संस्कृति और तमिल समुदाय की वैश्विक भूमिका प्रमुख रूप से नजर आई।
पीएम मोदी क्या बोले?
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने तमिल साहित्य को शाश्वत बताते हुए कहा कि तमिल संस्कृति सीमाओं से परे पूरी दुनिया में अपनी पहचान रखती है और भारत को वैश्विक मंच से जोड़ने में इसकी अहम भूमिका रही है। उन्होंने यह भी कहा कि तमिल भाषा भारत की ओर से दुनिया को दिया गया एक अनमोल उपहार है।पीएम मोदी ने देश के कई प्रमुख नेताओं का जिक्र किया जिनकी जड़ें तमिलनाडु से जुड़ी हैं। इनमें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम शामिल रहे। इससे साफ संकेत मिला कि तमिलनाडु का योगदान राष्ट्रीय राजनीति में कितना मजबूत है।प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि भारत और मलेशिया की भाषाओं में कई समान शब्द पाए जाते हैं, जिससे दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्ते और गहरे होते हैं।
मलेशिया में क्या बोले?
उन्होंने मलेशिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से तमिल प्रवासी समाज की सराहना करते हुए कहा कि ये लोग वहां की सामाजिक और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।कार्यक्रम के दौरान जब पीएम मोदी ने तमिलनाडु के दिग्गज अभिनेता और पूर्व मुख्यमंत्री एम. जी. रामचंद्रन (एमजीआर) का नाम लिया, तो वहां मौजूद लोगों ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया। उन्होंने यह भी साझा किया कि मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम एमजीआर के तमिल गीतों के प्रशंसक हैं।राजनीतिक दृष्टि से देखें तो पीएम मोदी का यह संबोधन ऐसे समय में आया है, जब देश में कई राज्यों में चुनावी माहौल बन रहा है। तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है और इससे पहले राज्य में नए चुनाव होने हैं। ऐसे में इस भाषण को तमिलनाडु की राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।आंकड़ों की बात करें तो मलेशिया में करीब 20 से 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या तमिल समुदाय की है। मलेशिया की कुल आबादी में भारतीय मूल के लोगों की हिस्सेदारी लगभग 7 से 9 प्रतिशत मानी जाती है। भारतीय प्रवासियों की संख्या के लिहाज से मलेशिया, अमेरिका और यूएई के बाद तीसरे स्थान पर आता है।प्रधानमंत्री के इस संबोधन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत की ताकत उसकी विविधता और सांस्कृतिक एकता में निहित है, जो देश के भीतर ही नहीं बल्कि दुनिया भर में बसे भारतीयों को भी एक सूत्र में बांधती है।

