भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसरोवर सभागार में आयोजित भव्य समारोह में सुप्रसिद्ध पत्रकार एवं साहित्यकार कृष्ण मोहन झा की सप्तम कृति ‘डा. मोहन भागवत संदेश’ का लोकार्पण किया गया। यह ग्रंथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा पिछले डेढ़ दशक के दौरान विभिन्न अवसरों पर दिए गए महत्वपूर्ण एवं विचारोत्तेजक व्याख्यानों की सूक्ष्म विवेचना पर आधारित है।
समारोह में महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद, ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के चीफ इमाम डा. उमेर अहमद इलियासी, आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डा. अशोक कुमार वार्ष्णेय, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी तथा मध्यप्रदेश के पूर्व गृहमंत्री डा. नरोत्तम मिश्र मंचासीन रहे। सभी अतिथियों ने ग्रंथ के रचयिता कृष्ण मोहन झा को उनकी नवीनतम कृति के प्रकाशन पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
डा. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि कृष्ण मोहन झा की यह कृति अपने आप में पूर्णता का अहसास कराती है। ग्रंथ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी रचना किसी एक विषय को केंद्र में रखकर नहीं की गई है। इसलिए इसका मूल्यांकन किसी सीमित दायरे में करना उचित नहीं होगा।
चीफ इमाम डा. उमेर अहमद इलियासी और स्वामी अखिलेश्वरानंद ने कहा कि कठिन से कठिन समस्याओं के समाधान के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत जिस प्रकार संवाद के रास्ते पर चलने का आह्वान करते हैं, उस पर समाज के सभी वर्गों को अमल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवाद और आपसी समझ के माध्यम से अनेक जटिल सामाजिक समस्याओं का समाधान संभव है।
पूर्व गृहमंत्री डा. नरोत्तम मिश्र ने ‘डा. मोहन भागवत संदेश’ को ‘गागर में सागर’ की संज्ञा देते हुए इसकी सराहना की। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने ग्रंथ की सफलता की कामना की।
समारोह के दौरान लेखक कृष्ण मोहन झा ने जब यह घोषणा की कि अशोक वाटिका में माता सीता को मातृवत संरक्षण प्रदान करने वाली ‘त्रिजटा’ के चरित्रगत विशेषताओं को केंद्र में रखकर लिखा गया उनका एक शोधपूर्ण उपन्यास शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रहा है, तो मानसरोवर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
उल्लेखनीय है कि कृष्ण मोहन झा की अब तक सात कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। ‘डा. मोहन भागवत संदेश’ उनकी साहित्यिक यात्रा की नवीनतम कड़ी है, जिसमें संघ प्रमुख के विचारों और सामाजिक सरोकारों को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

