भारत की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) केवल रोजगार सृजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे देश के औद्योगिक विकास और स्थानीय उद्यमिता की रीढ़ भी हैं। ऐसे समय में जब डिजिटल तकनीक व्यापार के हर क्षेत्र को बदल रही है, “डिजिटल भारत: इंडिया डिजिटल प्रोक्योरमेंट रिपोर्ट 2026” यह संकेत देती है कि भारतीय एमएसएमई अब पारंपरिक खरीद प्रणाली से आगे बढ़कर डिजिटल खरीद (Digital Procurement) को भविष्य की आवश्यकता मान रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, हर पांच में से चार एमएसएमई मानते हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म उनके व्यवसाय के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण हैं। 27 हजार से अधिक पंजीकृत एमएसएमई पर आधारित यह अध्ययन दर्शाता है कि भारत की एमएसएमई खरीद अर्थव्यवस्था का अनुमानित आकार 124.9 लाख करोड़ रुपये है। यह आंकड़ा बताता है कि यदि इस क्षेत्र में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ती है, तो इसका प्रभाव पूरे भारतीय उद्योग और अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा।
डिजिटल खरीद का सबसे बड़ा लाभ पारदर्शिता है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से उद्यमियों को कीमतों की तुलना करने, गुणवत्तापूर्ण आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंचने, समय पर सामग्री प्राप्त करने और खरीद लागत कम करने का अवसर मिलता है। विशेष रूप से छोटे उद्यमों के लिए, जिनके पास सीमित संसाधन होते हैं, यह व्यवस्था प्रतिस्पर्धा में बने रहने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
अध्ययन में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल 75 प्रतिशत से अधिक एमएसएमई हर महीने खरीद (प्रोक्योरमेंट) पर 10 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच खर्च करते हैं। इसके बावजूद, कुल खरीद व्यय का केवल 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा ही वर्तमान में डिजिटल माध्यमों से किया जा रहा है, जो इस क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 64.5 प्रतिशत खरीद संबंधी निर्णय अभी भी सीधे व्यवसाय के मालिक स्वयं लेते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल प्रोक्योरमेंट प्लेटफॉर्म को जटिल कॉरपोरेट प्रक्रियाओं के बजाय सरल, सहज और सभी के लिए सुलभ बनाया जाना चाहिए, ताकि छोटे और मध्यम उद्यम भी इन्हें आसानी से अपना सकें। अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री केशवेंद्र कुमार (आईएएस) ने कहा,”मैं इंडिया एसएमई फोरम को ‘इंडिया एमएसएमई डिजिटल प्रोक्योरमेंट रिपोर्ट’ जारी करने के लिए बधाई देता हूं। यह रिपोर्ट एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के एक अत्यंत महत्वपूर्ण, लेकिन अपेक्षाकृत कम अध्ययन किए गए क्षेत्र पर मूल्यवान जानकारी प्रदान करती है।” उन्होंने कहा कि प्रोक्योरमेंट प्रणाली को मजबूत बनाना छोटे उद्यमों की उत्पादकता बढ़ाने, लागत कम करने और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। सरकार द्वारा एमएसएमई से की जाने वाली खरीद में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जो इस क्षेत्र में लगातार किए गए नीतिगत प्रयासों के सकारात्मक परिणामों को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस रिपोर्ट के निष्कर्ष भविष्य की नीतियां तैयार करने और भारत के एमएसएमई क्षेत्र के निरंतर विकास को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि सर्वेक्षण में कई डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाओं का मूल्यांकन किया गया, जिनमें अलग-अलग श्रेणियों में विभिन्न कंपनियों को प्राथमिकता मिली। ऐसे सर्वेक्षण बाजार की प्रवृत्तियों को समझने में उपयोगी होते हैं, लेकिन किसी भी मंच का चयन करते समय एमएसएमई को अपनी आवश्यकताओं, लागत, सेवा गुणवत्ता और दीर्घकालिक व्यावसायिक हितों का स्वतंत्र मूल्यांकन करना चाहिए।
सरकार की “डिजिटल इंडिया”, “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी पहलों की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि देश का एमएसएमई क्षेत्र डिजिटल बदलाव को कितनी तेजी और प्रभावशीलता से अपनाता है। इसके लिए केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि वित्तीय सहायता, कौशल विकास, साइबर सुरक्षा और मजबूत डिजिटल अवसंरचना भी समान रूप से आवश्यक है। रिपोर्ट के निष्कर्षों पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेज़न बिजनेस इंडिया के निदेशक मित्रंजन भादुड़ी ने कहा,
“इंडिया एसएमई फोरम की यह रिपोर्ट भारत की एमएसएमई खरीद (प्रोक्योरमेंट) अर्थव्यवस्था में मौजूद अपार संभावनाओं को स्पष्ट रूप से सामने लाती है। अमेज़न बिजनेस में हम स्वयं को एक सक्षम भागीदार (एनएबलर) के रूप में देखते हैं, जो एमएसएमई को भरोसेमंद आपूर्तिकर्ताओं, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और सहज खरीद अनुभव तक पहुंच प्रदान करता है।
यह तथ्य कि हर पांच में से चार एमएसएमई मानते हैं कि डिजिटल प्रोक्योरमेंट उनके व्यवसाय की वृद्धि का प्रमुख आधार बनेगा, इस बात का मजबूत संकेत है कि डिजिटल बदलाव केवल एक तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि एक व्यापक कारोबारी परिवर्तन है। हम भारत के एमएसएमई की डिजिटल प्रोक्योरमेंट यात्रा में उनका सहयोग जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए हम उत्पादों के व्यापक चयन, बेहतर सेवाओं तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ऑटोमेशन और इनसाइट्स में लगातार निवेश कर रहे हैं, ताकि प्रोक्योरमेंट को केवल लागत का केंद्र (कॉस्ट सेंटर) न रहकर व्यवसाय की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त (कॉम्पिटिटिव एडवांटेज) का माध्यम बनाया जा सके।”
इंडिया एसएमई फोरम के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा, “लंबे समय तक खरीद (प्रोक्योरमेंट) को केवल एक नियमित परिचालन व्यय के रूप में देखा जाता रहा है, जबकि वास्तव में यह एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक माध्यम है। हमारे शोध से पता चलता है कि 124.9 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित आकार वाली भारत की एमएसएमई प्रोक्योरमेंट अर्थव्यवस्था, देश में डिजिटल परिवर्तन के सबसे बड़े आर्थिक अवसरों में से एक है।
हालांकि डिजिटल प्रोक्योरमेंट को अपनाने की गति तेज हुई है और दो-पांचवें (40 प्रतिशत से अधिक) एमएसएमई पिछले दो वर्षों से डिजिटल खरीद प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन अगला महत्वपूर्ण चरण उद्यमों को कभी-कभार ऑनलाइन खरीदारी से आगे बढ़ाकर पूरी तरह एकीकृत (इंटीग्रेटेड) और डेटा-आधारित प्रोक्योरमेंट प्रणाली की ओर ले जाना है। इसके लिए उद्योग जगत, अमेज़न बिजनेस जैसे सक्षम भागीदारों और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग आवश्यक होगा, ताकि मजबूत आपूर्तिकर्ता नेटवर्क विकसित किए जा सकें, प्रोक्योरमेंट से जुड़े वित्त तक पहुंच आसान बनाई जा सके और बड़े स्तर पर डिजिटल क्षमताओं का विकास किया जा सके।”
रिपोर्ट में भारत के तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल प्रोक्योरमेंट परिदृश्य का भी विश्लेषण किया गया है। इसमें विभिन्न व्यावसायिक आवश्यकताओं को पूरा करने वाले पांच अलग-अलग डिजिटल प्रोक्योरमेंट मॉडलों की पहचान की गई है। डिजिटल खरीद प्रणाली भारतीय एमएसएमई के लिए केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने का अवसर है। यदि सरकार, उद्योग और डिजिटल सेवा प्रदाता मिलकर छोटे उद्यमों को सशक्त बनाने की दिशा में काम करें, तो यही परिवर्तन भारत को एक अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और आत्मनिर्भर औद्योगिक अर्थव्यवस्था की ओर ले जा सकता है।
प्रमुख निष्कर्ष: भारत की एमएसएमई प्रोक्योरमेंट अर्थव्यवस्था का परिदृश्य
रिपोर्ट में भारत के एमएसएमई क्षेत्र की खरीद (प्रोक्योरमेंट) प्रणाली और डिजिटल अपनाने की प्रवृत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए हैं—
- कीमतों में उतार-चढ़ाव (55.7%) एमएसएमई के लिए खरीद प्रक्रिया की सबसे बड़ी चुनौती है। इसके बाद अनेक आपूर्तिकर्ताओं का प्रबंधन (37.6%), भुगतान और ऋण संबंधी बाधाएं (35.6%) तथा एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता का अभाव (33.4%) प्रमुख समस्याओं के रूप में सामने आए।
- डिजिटल प्रोक्योरमेंट समाधान चुनते समय एमएसएमई सबसे अधिक जीएसटी-अनुपालक (GST-compliant) बिलिंग (45.0%), उत्पादों की व्यापक उपलब्धता (43.3%), ऑर्डर देने में आसानी (43.1%) और तेज डिलीवरी (40.3%) को महत्व देते हैं। इसके अलावा, लगभग आधे (49.9%) उद्यम लचीली भुगतान और ऋण (क्रेडिट) सुविधाओं को भी प्राथमिकता देते हैं।
- हर पांच में से चार (80.4%) एमएसएमई का मानना है कि अगले तीन वर्षों में डिजिटल प्रोक्योरमेंट उनके व्यवसाय के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- भविष्य में ऑनलाइन खरीद के लिए कच्चा माल (68.7%) तथा मशीनरी और उपकरण (61.3%) एमएसएमई की सबसे प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। इससे संकेत मिलता है कि उद्यम अब केवल सामान्य उपभोग की वस्तुओं तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि अपने मुख्य उत्पादन संसाधनों की खरीद भी डिजिटल माध्यमों से करने के लिए तैयार हैं।

