आई4सी, 1930 हेल्पलाइन और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से मजबूत हुई साइबर सुरक्षा; 29,837 से अधिक आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में बढ़ते साइबर अपराधों और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बहुस्तरीय और समन्वित व्यवस्था विकसित की है। गृह मंत्रालय के अनुसार, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के माध्यम से साइबर अपराध की रोकथाम, जांच, वित्तीय धोखाधड़ी पर नियंत्रण और जनजागरूकता के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें लागू की गई हैं।
हालांकि संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं, लेकिन केंद्र सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता प्रदान कर साइबर अपराध से निपटने में सहयोग कर रही है।
₹11,158 करोड़ की ठगी बचाई, 32.80 लाख से अधिक शिकायतों का समाधान
गृह मंत्रालय ने बताया कि आई4सी के अंतर्गत वर्ष 2021 में शुरू की गई नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS) के जरिए 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए ₹11,158 करोड़ से अधिक की राशि साइबर ठगों के हाथों में जाने से बचाई गई है।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1930 तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) भी संचालित किए जा रहे हैं, जहां नागरिक ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
15.75 लाख सिम और 5.77 लाख IMEI नंबर ब्लॉक
सरकार ने साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 15.75 लाख से अधिक सिम कार्ड और 5.77 लाख IMEI नंबर ब्लॉक किए हैं। इसके अलावा, संदिग्ध बैंक खातों और पहचानकर्ताओं की निगरानी के लिए विकसित सस्पेक्ट रजिस्ट्री के माध्यम से 30.48 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ताओं और 32.08 लाख लेयर-1 फर्जी खातों का डेटा बैंकों के साथ साझा किया गया, जिससे ₹25,698 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन को रोका जा सका।
साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए अत्याधुनिक केंद्र
आई4सी के अंतर्गत स्थापित साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (CFMC) में बैंक, वित्तीय संस्थान, भुगतान एग्रीगेटर, दूरसंचार सेवा प्रदाता, आईटी इंटरमीडियरी और विभिन्न राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियां मिलकर वास्तविक समय में साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए कार्य कर रही हैं।
29,837 से अधिक आरोपी गिरफ्तार
गृह मंत्रालय के अनुसार, आई4सी के ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल और समन्वय प्लेटफॉर्म की मदद से विभिन्न राज्यों में साइबर अपराधियों की पहचान और नेटवर्क विश्लेषण आसान हुआ है। इसके परिणामस्वरूप अब तक 29,837 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है तथा 2.33 लाख से अधिक साइबर जांच सहायता अनुरोधों का निपटारा किया गया है।
साइबर कमांडो और डिजिटल जांच प्रणाली को मिली मजबूती
देश में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 10 सितंबर 2024 को साइबर कमांडो कार्यक्रम शुरू किया गया। अब तक 281 साइबर कमांडो विशेष प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं।
इसके अलावा, नई दिल्ली और असम में स्थापित राष्ट्रीय डिजिटल जांच सहायता केंद्र ने 14,064 से अधिक साइबर अपराध मामलों में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस को डिजिटल फोरेंसिक सहायता उपलब्ध कराई है।
पुलिस और न्यायिक अधिकारियों का व्यापक प्रशिक्षण
आई4सी द्वारा विकसित ‘साइट्रेन’ (CyTrain) पोर्टल के माध्यम से साइबर अपराध जांच, डिजिटल फोरेंसिक और अभियोजन संबंधी ऑनलाइन प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। 30 जून 2026 तक 1.63 लाख से अधिक पुलिस और न्यायिक अधिकारी इस पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं तथा 1.61 लाख से अधिक प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं।
जनजागरूकता पर भी विशेष जोर
केंद्र सरकार साइबर अपराध के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 1930 हेल्पलाइन, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, CyberDost सोशल मीडिया अभियान, एसएमएस अलर्ट, टीवी और रेडियो अभियान, स्कूल एवं कॉलेज कार्यक्रम, सिनेमाघरों में प्रचार, आईपीएल, मेट्रो स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर डिजिटल डिस्प्ले जैसे अनेक माध्यमों का उपयोग कर रही है।
गृह मंत्रालय ने साइबर शिकायतों के त्वरित निपटारे और पीड़ितों को ठगी गई राशि शीघ्र वापस दिलाने के लिए फंड रिस्टोरेशन मॉड्यूल और ग्रिवेंस रिड्रेसल मॉड्यूल भी अप्रैल 2026 से लागू कर दिए हैं। इसके साथ ही शिकायतों के निस्तारण में एकरूपता और तेजी लाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की गई है।

