नई दिल्ली: NEET परीक्षा विवाद के बाद हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच देशभर में दर्ज की गई सभी FIR रद्द करने का निर्देश दिया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का भरोसा दिया था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा सुधारों से जुड़ी मांगों और युवाओं के उत्थान को प्राथमिकता देगी।
नड्डा ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया गया था। इसके लिए बीजेपी शासित राज्यों की सरकारों से भी बातचीत की गई और अब इस दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए FIR रद्द करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अपने आप में अपराध नहीं है। हालांकि, जिन लोगों पर शारीरिक नुकसान पहुंचाने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप हैं, उनके खिलाफ राज्य कानून के मुताबिक कार्रवाई कर सकता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके इस आदेश का फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी से जुड़ी लंबित संवैधानिक चुनौती पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से NEET विवाद के बाद हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों को बड़ी राहत मिली है। वहीं, केंद्र सरकार ने इसे छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया है।

