नई दिल्ली। अखिल भारतीय हिंदू महासभा (एबीएचएम) के नेतृत्व और संगठन के नियंत्रण को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में 5 अगस्त को नई दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। संगठन के निर्वाचित पदाधिकारियों और सदस्यों ने आरोप लगाया है कि पिछले लगभग दो दशकों से महासभा का संचालन अनधिकृत लोगों द्वारा किया जा रहा है तथा संगठन की वैध संरचना और संपत्तियों पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
निर्वाचित सदस्यों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि संगठन की संपत्तियों, दस्तावेजों और नेतृत्व से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही स्वयंभू अध्यक्ष बताए जा रहे स्वामी चक्रपाणि महाराज की सदस्यता, पहचान और दस्तावेजों की भी न्यायिक जांच की मांग की गई है।
वर्ष 2006 में दिनेश चंद्र त्यागी के अध्यक्ष चुने जाने का दावा
संगठन के निर्वाचित सदस्यों के अनुसार वर्ष 2006 में दिनेश चंद्र त्यागी को अखिल भारतीय हिंदू महासभा का वैध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। उनका आरोप है कि नेतृत्व को लेकर कानूनी विवाद लंबित रहने के बावजूद स्वामी चक्रपाणि ने स्वयं को चुनाव आयोग और विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर संगठन का अधिकृत पदाधिकारी बताया। सदस्यों का यह भी दावा है कि संगठन के नाम और प्रतिष्ठा का उपयोग निजी हितों के लिए किया गया, जिससे लंबे समय तक कानूनी और प्रशासनिक विवाद उत्पन्न हुए।
पहचान संबंधी दस्तावेजों पर उठाए सवाल
प्रेस बयान में स्वामी चक्रपाणि की पहचान से जुड़े विभिन्न दस्तावेजों में कथित विसंगतियों का भी उल्लेख किया गया है। निर्वाचित सदस्यों का दावा है कि वर्ष 2005 के राशन कार्ड, 2007 के पासपोर्ट, बाद की गजट अधिसूचना, 2012 के जन्म प्रमाणपत्र तथा 2022 में जारी पासपोर्ट में माता-पिता, जन्म वर्ष और पहचान संबंधी विवरणों में अंतर दिखाई देता है। उनका आरोप है कि इन दस्तावेजों के आधार पर व्यक्ति की मूल पहचान स्पष्ट नहीं होती।
सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ पहचान संबंधी दस्तावेज स्थायी आवासीय पते के बजाय संगठन के पंजीकृत कार्यालय के पते पर जारी किए गए।
न्यायिक जांच की मांग
निर्वाचित नेतृत्व का कहना है कि यह मामला केवल संगठन के आंतरिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व की संस्था की विश्वसनीयता से भी जुड़ा है। उन्होंने सभी उपलब्ध दस्तावेजों की पारदर्शी न्यायिक जांच कराने और संगठन की वैध नेतृत्व व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग की है।
5 अगस्त को अगली सुनवाई
यह मामला वर्तमान में नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में विचाराधीन है और इसकी अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को निर्धारित है।

