नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने संसद भवन परिसर में विपक्षी सांसदों द्वारा संत वेश धारण कर किए गए प्रदर्शन की कड़ी आलोचना करते हुए इसे सनातन धर्म, साधु-संतों और हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कृत्य लोकतांत्रिक मर्यादाओं के साथ-साथ धार्मिक परंपराओं के भी विरुद्ध हैं।
डॉ. जैन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थित निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी तथा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के अन्य सांसदों द्वारा संत वेश धारण कर किया गया प्रदर्शन बेहद निम्नस्तरीय और आपत्तिजनक है। उनके अनुसार, धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक प्रदर्शन के लिए उपयोग करना करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में संतों और धार्मिक प्रतीकों का विशेष सम्मान रहा है। ऐसे में उनका राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग करना उचित नहीं माना जा सकता। डॉ. जैन ने रामायण का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार रावण ने छल के लिए साधु का वेश धारण किया था, उसी प्रकार धार्मिक प्रतीकों का दुरुपयोग समाज में भ्रम और आस्था पर आघात पहुंचाने का प्रयास है।
वीएचपी नेता ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल लंबे समय से हिंदू आस्थाओं के प्रति विरोधात्मक रवैया अपनाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन से लेकर भव्य राम मंदिर निर्माण तक विभिन्न मुद्दों पर ऐसे रुख देखने को मिले हैं और वर्तमान प्रदर्शन भी उसी मानसिकता का विस्तार है।
डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि हिंदू समाज धैर्यवान और सहिष्णु है, लेकिन उसकी सहनशीलता को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें भाषाई व संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे से बाहर जाने पर मजबूर न किया जाए।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि संबंधित नेताओं में साहस है तो वे किसी अन्य धर्म के धर्मगुरुओं या धार्मिक प्रतीकों का इस प्रकार उपयोग करके दिखाएं। उनके अनुसार, ऐसा करने पर व्यापक विरोध देखने को मिलेगा।
विश्व हिंदू परिषद ने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की है कि संसद परिसर में धार्मिक प्रतीकों के कथित अनादर के मामले में संबंधित सांसदों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। संगठन ने यह भी कहा कि वह इस मामले में धार्मिक भावनाएं आहत होने के आधार पर कानूनी कार्रवाई की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है।
डॉ. जैन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस प्रकार की घटनाओं पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो देशभर के साधु-संतों और हिंदू समाज में व्यापक आक्रोश देखने को मिल सकता है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से धार्मिक प्रतीकों और आस्थाओं का सम्मान करने तथा सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक और सामाजिक मर्यादाओं का पालन करने की अपील की।

