नई दिल्ली। राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में गुरुवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में बस्तर संभाग के प्रतिनिधिमंडल ने भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता, बस्तर के परगना मांझी और चालकी सहित अनेक जनजातीय प्रतिनिधि शामिल थे। इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की गौरवशाली परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय विरासत का उत्सव है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बस्तर की वास्तविक पहचान को स्थापित करना है।
राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजन युवाओं को अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं। ऐसे आयोजन पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करते हैं।
उन्होंने बस्तर की सामाजिक व्यवस्था में मांझी और चालकी की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे समाज और प्रशासन के बीच मजबूत सेतु का कार्य करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व और समर्पण से क्षेत्र में शांति, सामाजिक समरसता और विकास को और अधिक बल मिलेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी के कारण आज बस्तर विकास की नई राह पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि लोग हिंसा के वातावरण से निकलकर शिक्षा, रोजगार और विकास के अवसरों से जुड़ रहे हैं। दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं तथा लंबे समय से बंद पड़े विद्यालयों में फिर से बच्चों की चहल-पहल लौट आई है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में आशा, विश्वास और प्रगति का नया वातावरण निर्मित हुआ है, जो पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
राष्ट्रपति ने जनजातीय युवाओं की प्रतिभा की भी सराहना करते हुए कहा कि वे शिक्षा, विज्ञान, कला और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज में खेल और कला की नैसर्गिक प्रतिभा होती है। हाल ही में आयोजित बस्तर ओलंपिक का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे युवाओं की प्रतिभा को मंच देने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
उन्होंने विश्वास जताया कि जनजातीय समाज अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी करेगा और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। साथ ही उन्होंने समाज में सहयोग और सद्भाव की संस्कृति को मजबूत करने, महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों तथा वंचित वर्गों के सशक्तीकरण और जल, पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के साथ बस्तर के मांझी-चालकी और बस्तर पंडुम के विजेताओं से संवाद किया। बाद में सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में पहली बार बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे बस्तरवासी इस बात का प्रमाण हैं कि जो बस्तर कभी नक्सली हिंसा के कारण अपनी समृद्ध संस्कृति और विरासत खोता जा रहा था, वह आज नक्सलमुक्त होकर अपनी धरोहरों को सहेज रहा है।
उन्होंने कहा कि विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा बस्तर आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का सबसे विकसित संभाग बनकर विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। अमित शाह ने इसे बस्तर में शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में हो रहे व्यापक परिवर्तन का प्रतीक बताया।

