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हाईकोर्ट का सख्त आदेश: 24 घंटे में हटेंगे अवैध पोस्टर-होर्डिंग, क्या नेताओं की ‘झांकीबाजी’ पर लगेगी रोक?

राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनरों पर कार्रवाई के निर्देश; नियमों की अनदेखी पर निगम अधिकारियों के खिलाफ भी होगी दंडात्मक कार्रवाई

भोपाल/इंदौर। मध्यप्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर नेताओं के बड़े-बड़े पोस्टर, कटआउट और बैनरों की बढ़ती संस्कृति पर अब न्यायपालिका ने सख्त रुख अपनाया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सार्वजनिक स्थलों पर लगे सभी अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक पोस्टरों तथा होर्डिंगों को 24 घंटे के भीतर हटाया जाए। अदालत ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पिछले कुछ समय से विशेष रूप से इंदौर सहित प्रदेश के कई शहरों में विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक आयोजनों के नाम पर बड़े पैमाने पर पोस्टरबाजी देखने को मिल रही थी। भाजपा नेताओं के स्वागत से लेकर कांग्रेस की रैलियों तक, सार्वजनिक स्थानों पर बड़े-बड़े कटआउट और फ्लेक्स लगाए जा रहे थे। कई स्थानों पर निजी विज्ञापन संरचनाओं (एडवरटाइजिंग स्ट्रक्चर) पर भी बिना अनुमति पोस्टर चिपका दिए जाते थे, जिससे न केवल शहर की सुंदरता प्रभावित होती थी बल्कि विज्ञापन कंपनियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।

इसी मामले को लेकर एसएस एडवर्टाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड, जबलपुर सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि नगर निगम को निर्धारित शुल्क देकर संचालित किए जा रहे वैध विज्ञापन स्ट्रक्चरों पर अक्सर राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा बिना अनुमति पोस्टर लगाए जाते हैं। इससे विज्ञापन संरचनाओं को नुकसान पहुंचता है तथा नियमों का खुला उल्लंघन होता है।

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने नगर निगमों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल द्वारा किसी स्वीकृत विज्ञापन होर्डिंग पर बिना अनुमति पोस्टर लगाया जाता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही यदि नगर निगम का अमला कार्रवाई में लापरवाही बरतता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय के आदेश की अवमानना की कार्रवाई भी की जा सकती है।

हाईकोर्ट का यह आदेश केवल इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि भोपाल सहित पूरे मध्यप्रदेश के सभी शहरों में प्रभावी रहेगा। आदेश के बाद इंदौर नगर निगम ने तत्काल कार्रवाई शुरू करते हुए कई स्थानों से अवैध होर्डिंग और पोस्टर हटाने का अभियान भी चलाया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई केवल शुरुआती दिनों तक सीमित रहेगी या फिर लंबे समय तक प्रभावी ढंग से लागू की जाएगी। यदि आदेश का कड़ाई से पालन होता है तो सार्वजनिक स्थानों पर नेताओं की ‘झांकीबाजी’ और अवैध पोस्टर संस्कृति पर काफी हद तक अंकुश लग सकता है।

आउटडोर मीडिया रूल्स-2017 के प्रमुख प्रावधान

आउटडोर मीडिया रूल्स-2017 के अनुसार निम्न प्रकार के स्ट्रक्चर और होर्डिंग प्रतिबंधित अथवा अवैध माने जाते हैं—

  • ऐतिहासिक धरोहरों, राजभवन, हाईकोर्ट तथा धार्मिक स्थलों के प्रतिबंधित दायरे में लगाए गए विज्ञापन स्ट्रक्चर।
  • ट्रैफिक सिग्नल, चौराहों या संवेदनशील मोड़ों के पास तेज रोशनी अथवा झिलमिलाती स्क्रीन वाले होर्डिंग।
  • बिजली के खंभों, पेड़ों, डिवाइडरों या अन्य सार्वजनिक स्थलों पर बिना अनुमति लगाए गए फ्लेक्स, पोस्टर और कटआउट।
  • रजिस्टर्ड चार्टर्ड या स्ट्रक्चरल इंजीनियर के सुरक्षा प्रमाणपत्र के बिना स्थापित विज्ञापन स्ट्रक्चर।
  • ट्रैफिक सिग्नल, रोड साइनबोर्ड या दिशा-सूचक संकेतों को ढंकने वाले होर्डिंग।
  • फुटपाथ, सर्विस रोड या रोड डिवाइडर पर पैदल यात्रियों का रास्ता बाधित करने वाले यूनिपोल और विज्ञापन बोर्ड।
  • निर्धारित आकार से बड़े अथवा हवा के दबाव एवं भार संबंधी सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले स्ट्रक्चर।
  • बिना अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना लगाए गए सभी विज्ञापन स्ट्रक्चर।

यदि इसे किसी समाचार पत्र के विश्लेषण (Analysis) या ग्राउंड रिपोर्ट के रूप में तैयार करना हो, तो मैं उसे भी उसी शैली में लिख सकता हूँ।

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