संसद पहुंचने पर भाजपा सांसदों ने तालियों से किया स्वागत, बोले- कुछ नहीं हुआ, जमीन पर संघर्ष करने वाला कार्यकर्ता हूं
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के दो दिन बाद सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में भाजपा सांसदों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया। इस दौरान धर्मेंद्र प्रधान मुस्कुराते हुए नजर आए और पार्टी नेताओं से आत्मीयता से मिले।
स्वागत के दौरान कांग्रेस नेता जयराम रमेश भी धर्मेंद्र प्रधान के पास पहुंचे और उनके इस्तीफे पर सहानुभूति जताते हुए कहा, “ऐसा होता रहता है।” इस पर प्रधान ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “कुछ नहीं हुआ। मैं स्ट्रीट फाइटर हूं, एसी कमरे में बैठकर काम करने वाला एक्टिविस्ट नहीं हूं।”
प्रधान के इस बयान को भाजपा नेताओं ने उनके आत्मविश्वास और राजनीतिक सक्रियता का संकेत माना। पार्टी के नेताओं का कहना है कि कैबिनेट से बाहर होने के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान संगठन और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
अगली जिम्मेदारी को लेकर अटकलें तेज
धर्मेंद्र प्रधान भाजपा के ओडिशा के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और उन्हें समय-समय पर संगठन तथा चुनाव से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाती रही हैं। ऐसे में उनके इस्तीफे के बाद पार्टी में उनकी नई भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
छात्र आंदोलनों के बीच दिया था इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। यह फैसला विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा परीक्षा व्यवस्था और कथित पेपर लीक के मुद्दे पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच आया।
परीक्षा सुधार के लिए उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन
इस बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। यह समिति परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ बनाने और व्यापक सुधारों के लिए सुझाव देगी।
पेपर लीक विरोधी कानून में संशोधन का प्रस्ताव
सरकार ने लोकसभा में पेपर लीक विरोधी कानून में संशोधन संबंधी विधेयक भी पेश किया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए 10 वर्ष तक के कारावास और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करना और छात्रों के हितों की रक्षा करना है।

