प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों पांच देशों की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पर हैं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड, स्वीडन, नार्वे और इटली की यह यात्रा वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। पश्चिमी एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बीच भारत अपने मित्र देशों के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के दौर में भारत की विदेश नीति बहुआयामी साझेदारी और संतुलित कूटनीति पर केंद्रित है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और निवेश जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के पहले चरण में संयुक्त अरब अमीरात पहुंचे, जहां अबूधाबी में उनका भव्य स्वागत किया गया। यूएई भारत का प्रमुख रणनीतिक और व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, डिजिटल तकनीक और रक्षा सहयोग को लेकर उच्चस्तरीय वार्ता हुई। इस दौरान भारत-यूएई संबंधों को नई गति देने और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी चर्चा की गई।
अबूधाबी में प्रधानमंत्री मोदी और यूएई नेतृत्व के बीच हुई बैठक में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों में आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का दूसरा पड़ाव नीदरलैंड रहा। वहां उनके स्वागत समारोह में भारतीय संस्कृति और स्थानीय परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। रंगारंग प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच भारतीय समुदाय ने भी प्रधानमंत्री का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
नीदरलैंड के साथ भारत के संबंध जल प्रबंधन, कृषि तकनीक, हरित ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में लगातार मजबूत हो रहे हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा हो सकती है।

