दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिर चर्चा में हैं। हालांकि, केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार ही नहीं, बल्कि अलग-अलग देशों की टैक्स नीतियां भी ईंधन की अंतिम कीमत तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।Netherlands इस समय पेट्रोल पर सबसे ज्यादा टैक्स लगाने वाले देशों में अग्रणी माना जाता है।
यहां प्रति लीटर लगभग €0.845 तक टैक्स वसूला जाता है, जो खुदरा कीमत का बड़ा हिस्सा होता है।इसके बाद Denmark का स्थान आता है, जहां पेट्रोल पर करीब €0.717 प्रति लीटर टैक्स लगता है। वहीं Italy में यह आंकड़ा लगभग €0.713 प्रति लीटर के आसपास है। इटली में खास बात यह है कि डीजल पर भी टैक्स का हिस्सा काफी अधिक है और कुल कीमत का आधे से ज्यादा भाग टैक्स से आता है।
Slovenia भी इस मामले में उल्लेखनीय है, जहां पेट्रोल की कीमत का लगभग 58% हिस्सा टैक्स के रूप में शामिल होता है। वहीं United Kingdom में डीजल पर टैक्स यूरोपीय औसत से अधिक है, जो पर्यावरणीय नीतियों और सरकारी राजस्व की जरूरतों को दर्शाता है।यूरोप के कई देश ईंधन पर अधिक टैक्स इसलिए लगाते हैं ताकि निजी वाहनों के उपयोग को कम किया जा सके, प्रदूषण घटे और लोग सार्वजनिक परिवहन की ओर आकर्षित हों।
इसके अलावा, इन टैक्स से सरकारें बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं के लिए फंड भी जुटाती हैं।अगर भारत की बात करें तो India में भी ईंधन पर टैक्स लंबे समय से अहम राजस्व स्रोत रहा है। कुछ साल पहले तक पेट्रोल और डीजल की कीमत में टैक्स का हिस्सा काफी ज्यादा था। हालांकि, हाल के समय में वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने उत्पाद शुल्क में कटौती की है, जिससे उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है।

