छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े नक्सली कमांडर पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ पुलिस और प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और स्थानीय प्रशासन मौजूद रहे, वहीं आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों ने इन सभी का मुख्यधारा में स्वागत किया।राज्य के गृहमंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि इस आत्मसमर्पण के बाद बस्तर क्षेत्र में शीर्ष स्तर के माओवादी नेतृत्व का लगभग अंत हो चुका है।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में हजारों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां भी हुई हैं। सुरक्षा बलों द्वारा कई अभियानों में सैकड़ों माओवादी मारे भी गए हैं।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में कुछ वरिष्ठ सदस्य भी शामिल हैं। उनके पास से हथियार और नकदी बरामद की गई है। बताया गया कि इस कार्रवाई के बाद बस्तर में सक्रिय नक्सली नेतृत्व काफी कमजोर हो गया है और अब केवल सीमित संख्या में छोटे समूह ही बचे हैं।
सरकार का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें। इसके साथ ही क्षेत्र में शांति बहाल होने पर सुरक्षा कैंपों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उन्हें स्थानीय रोजगार से जुड़े केंद्रों में बदलने की योजना भी बनाई जा रही है।पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने इसे सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि बताया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा तय समयसीमा के भीतर कई बड़े नक्सलियों का आत्मसमर्पण होना एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में छिपाए गए विस्फोटकों (IED) को निष्क्रिय करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है और इसके लिए अभियान जारी रहेगा।सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के कदमों से बस्तर क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास का रास्ता मजबूत होगा।

