उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित समुदाय को साधने के लिए Indian National Congress ने नई रणनीति तैयार की है। इसी क्रम में पार्टी ने बहुजन आंदोलन के प्रमुख नेता Kanshi Ram की जयंती को बड़े स्तर पर मनाने का फैसला किया है।कांग्रेस 13 मार्च को कांशीराम की जयंती को “सामाजिक परिवर्तन दिवस” के रूप में मनाएगी।
इस अवसर पर पूरे प्रदेश में करीब एक सप्ताह तक सामाजिक और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दलित और पिछड़े वर्गों के बीच सामाजिक न्याय के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना बताया जा रहा है।इस अभियान की शुरुआत लखनऊ के Indira Gandhi Pratishthan में आयोजित एक कार्यक्रम से होगी।
यहां होने वाले आयोजन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में दलित-पिछड़े समाज के बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक कांग्रेस का यह कदम आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर उठाया गया माना जा रहा है।
पार्टी के भीतर यह आकलन किया जा रहा है कि बहुजन आंदोलन की विरासत को सामने लाकर दलित समाज के एक हिस्से को फिर से अपने साथ जोड़ा जा सकता है।कांग्रेस का मानना है कि कांशीराम का दिया गया नारा—“जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी”—आज भी सामाजिक न्याय की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। पार्टी इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए सामाजिक प्रतिनिधित्व और समान भागीदारी की बात कर रही है।
बीते कुछ समय से राहुल गांधी भी लगातार जातिगत जनगणना की मांग उठा रहे हैं और इसे सामाजिक न्याय के मुद्दे से जोड़कर पेश कर रहे हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि इन मुद्दों के जरिए दलित और पिछड़े वर्गों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का मौका मिल सकता है।इसके साथ ही पार्टी नेताओं का मानना है कि सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा जैसे मुद्दों को सामने रखकर आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक नया राजनीतिक संदेश दिया जा सकता है।

