साल 2024 के चर्चित पुणे पोर्श हादसे से जुड़े मामले में मंगलवार (10 मार्च) को Supreme Court of India ने नाबालिग आरोपी के पिता Vishal Agarwal को जमानत दे दी। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी।Justice B. V. Nagarathna और Justice Ujjal Bhuyan की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लंबे समय तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि विशाल अग्रवाल लगभग 22 महीनों से हिरासत में हैं।कोर्ट ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत दी है। आदेश के अनुसार, अग्रवाल को ट्रायल के दौरान जांच में पूरा सहयोग करना होगा, किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करना होगा और न ही सबूतों के साथ छेड़छाड़ करनी होगी।सुनवाई के दौरान अग्रवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील Mukul Rohatgi और Siddharth Dave ने अदालत को बताया कि इस मामले के अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
उनका कहना था कि जब तक किसी को अदालत दोषी साबित न करे, तब तक उसे सजा देना न्यायसंगत नहीं है।सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की शर्तों के आधार पर जमानत मंजूर करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी किसी भी गवाह से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेगा। साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का निर्देश दिया और कहा कि अगर जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है तो Maharashtra सरकार जमानत रद्द कराने के लिए आवेदन दे सकती है।हालांकि, राज्य सरकार और पीड़ित परिवार ने जमानत का विरोध किया था।
पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील Gopal Sankaranarayanan ने अदालत में आरोप लगाया कि अग्रवाल ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की। वहीं राज्य सरकार की ओर से वकील Siddharth Dharmadhikari ने दावा किया कि खून के सैंपल बदलवाने के लिए पैसे दिए गए थे।बताया जाता है कि विशाल अग्रवाल को 1 जून 2024 को गिरफ्तार किया गया था।
आरोप है कि उनके 17 वर्षीय बेटे ने देर रात पार्टी से लौटते समय कथित रूप से शराब के नशे में कार चलाते हुए दो बाइक सवारों को टक्कर मार दी, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि कार के साथ एक ड्राइवर मौजूद था, लेकिन कई बार नाबालिग खुद वाहन चलाने की जिद कर लेते हैं। वकील का कहना था कि अग्रवाल को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके बेटे ने ड्राइवर से गाड़ी अपने हाथ में ले ली थी।

