मध्य पूर्व में हालिया घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से कथित तौर पर कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने व्यापक एहतियाती कदम उठाए हैं। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिका सुरक्षा हालात को लेकर चिंतित है।रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए मध्य पूर्व में अमेरिकी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।
हमलों में सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी दूतावास, बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय, कतर का अल उदीद एयर बेस और सऊदी अरब की तेल रिफाइनरी सुविधाएं शामिल बताई जा रही हैं।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका ने क्षेत्र से अपने राजनयिकों और गैर-आवश्यक कर्मचारियों को निकालना शुरू कर दिया है। सऊदी अरब और कुवैत में अमेरिकी दूतावासों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। सऊदी अरब में दूतावास ने ड्रोन हमले की पुष्टि करते हुए नागरिकों को अगली सूचना तक दूतावास परिसर से दूर रहने की सलाह दी है।
जिन लोगों की वीजा संबंधी अपॉइंटमेंट थी, उन्हें भी फिलहाल न आने को कहा गया है।इजरायल में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। यरूशलेम स्थित अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वह वहां से निकलने के इच्छुक अमेरिकी नागरिकों की सीधे सहायता करने की स्थिति में नहीं है। नागरिकों को मिस्र के सिनाई क्षेत्र की ओर जाने का विकल्प बताया गया है।
ताबा बॉर्डर क्रॉसिंग तक शटल सेवा शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है, हालांकि अमेरिकी सरकार ने इस विकल्प के उपयोग पर सुरक्षा की गारंटी देने से इनकार किया है।इससे पहले अमेरिकी राजदूत माइक हकबी ने कहा था कि इजरायल छोड़ने के विकल्प बेहद सीमित हैं। इसी बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों में तैनात गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को वापस बुलाने का आदेश दिया है।
संयुक्त अरब अमीरात, जिसे लंबे समय से अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र माना जाता रहा है, वहां से भी एहतियाती निकासी शुरू कर दी गई है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए क्षेत्र में रह रहे अपने नागरिकों से स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देश छोड़ने पर विचार करने की अपील की है।विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम सीधे तौर पर घबराहट नहीं, बल्कि संभावित खतरे को देखते हुए उठाए गए रणनीतिक और एहतियाती निर्णय हैं। फिलहाल क्षेत्र की स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें घटनाक्रम पर टिकी हैं।

