भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (एम एम नरवणे) इन दिनों राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। सोमवार को लोकसभा में उनके नाम को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और अंततः उसे स्थगित करना पड़ा।
कब शुरू हुआ विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक मैगजीन में छपे कथित कोट का हवाला देते हुए चीन से जुड़े मुद्दे पर सरकार पर सवाल उठाए। राहुल गांधी का कहना था कि यह कथन जनरल नरवणे की एक ऐसी किताब से जुड़ा है, जो अभी तक प्रकाशित भी नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि इसमें डोकलाम से जुड़ी घटनाओं का जिक्र किया गया है।सरकार की ओर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया आई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के दावों पर आपत्ति जताई। सत्ता पक्ष का कहना था कि किसी अप्रकाशित किताब और मैगजीन रिपोर्ट के आधार पर सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाना गलत है।अमित शाह ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कथित बयान जनरल नरवणे का नहीं, बल्कि मैगजीन की रिपोर्ट है, जिसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। इस दौरान सदन में भारी हंगामा हुआ। शुरुआती बहस के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा में मौजूद थे। हालात बिगड़ने के बाद कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया।बाद में भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एम एम नरवणे का एक पुराना इंटरव्यू साझा किया। इस वीडियो में नरवणे यह कहते नजर आ रहे हैं कि “एक इंच भी जमीन नहीं गई।” इस वीडियो के सामने आने के बाद राहुल गांधी के दावों पर और सवाल खड़े हो गए।
कौन हैं जनरल एम एम नरवणे?
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भारतीय सेना के 27वें थल सेना प्रमुख रहे हैं। उन्होंने 31 दिसंबर 2019 को जनरल बिपिन रावत के बाद सेना प्रमुख का पद संभाला। इसके अलावा वे 15 दिसंबर 2021 से 30 अप्रैल 2022 तक चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष भी रहे।एम एम नरवणे का जन्म 22 अप्रैल 1960 को पुणे में हुआ। वे भारतीय वायु सेना के एक पूर्व अधिकारी के पुत्र हैं। उन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA), पुणे और इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA), देहरादून से सैन्य शिक्षा प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने डिफेंस स्टडीज में एम.फिल की डिग्री भी हासिल की है।जून 1980 में उन्हें सिख लाइट इन्फैंट्री की 7वीं बटालियन में कमीशन मिला। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स की एक बटालियन, 106 इन्फैंट्री ब्रिगेड और असम राइफल्स की कमान संभाली। उन्होंने कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में आतंकवाद व उग्रवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व भी किया है।फिलहाल, संसद में हुआ यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है और राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।

